कीव/मॉस्को। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यूक्रेन के मोर्चे पर एक भारतीय छात्र ने यूक्रेनी सेना के सामने आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर दिया। रिपोर्टों के मुताबिक, यह छात्र रूसी सेना के लिए लड़ रहा था और उसने यूक्रेन में चल रहे संघर्ष के बीच खुद को अधिकारियों के हवाले कर दिया है।
यह मामला अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में इसलिए आया है क्योंकि छात्र किसी पेशेवर सैनिक के रूप में नहीं, बल्कि एक नागरिक के रूप में रूस पहुंचा था, और बाद में परिस्थितियों के चलते उसे युद्ध में शामिल होना पड़ा।
रूसी सेना में कैसे पहुंचा भारतीय छात्र
जानकारी के अनुसार, यह छात्र रूस में पढ़ाई के लिए गया था। वहां युद्ध की स्थिति के कारण उसे आर्थिक और वीजा संबंधी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। ऐसे में उसे रूसी सेना से जुड़ने के लिए बाध्य किया गया, जहां उसे सैनिकों की एक इकाई के साथ यूक्रेन सीमा पर तैनात किया गया था।
रिपोर्टों के मुताबिक, यूक्रेन में हालिया लड़ाई के दौरान छात्र ने खुद को यूक्रेनी बलों के हवाले कर दिया और कहा कि वह किसी भी तरह की हिंसा में शामिल नहीं होना चाहता। यूक्रेनी मीडिया ने दावा किया है कि उसने अधिकारियों को बताया कि उसे रूस में रहने के दौरान धोखे से भर्ती कर लिया गया था और उसे युद्ध में भेज दिया गया।
यूक्रेन के अधिकारियों की पुष्टि
यूक्रेनी सुरक्षा बलों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले व्यक्ति के पास से रूसी सेना की वर्दी और पहचान पत्र मिले हैं, लेकिन उसके पास कोई हथियार नहीं था। पूछताछ में उसने खुद को भारतीय नागरिक बताया और कहा कि वह रूस में एक विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहा था।
यूक्रेनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इस मामले की पूरी जांच की जा रही है और भारतीय दूतावास को इसकी जानकारी दी गई है।
भारत का रुख
कीव और मॉस्को स्थित भारतीय दूतावासों से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक भारत सरकार इस मामले की जानकारी जुटा रही है। विदेश मंत्रालय ने पहले भी अपने नागरिकों को युद्ध क्षेत्र से दूर रहने और किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि में शामिल न होने की सलाह दी थी।
रूस में विदेशी छात्रों की भर्ती पर उठे सवाल
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब रूस पर विदेशी नागरिकों को युद्ध में शामिल करने के आरोप पहले से लग रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में अफ्रीका और एशिया के कई देशों ने अपने नागरिकों के जबरन भर्ती किए जाने की शिकायतें दर्ज कराई हैं।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला रूस-यूक्रेन युद्ध के मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़े पहलुओं को और जटिल बना सकता है।
पृष्ठभूमि
रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 से युद्ध जारी है। अब तक दोनों देशों में लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं और हजारों सैनिकों की जान जा चुकी है। इस बीच किसी भारतीय छात्र का युद्ध में शामिल होना और फिर सरेंडर करना इस संघर्ष की नई और चिंताजनक तस्वीर पेश करता है।
यदि यूक्रेन की जांच में भारतीय छात्र की पहचान और बयान की पुष्टि होती है, तो यह भारत, रूस और यूक्रेन—तीनों देशों के लिए एक संवेदनशील राजनयिक मुद्दा बन सकता है।





