नयी दिल्ली।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा हाल ही में जेनरेशन-Z (Gen-Z) को संबोधित किए गए बयान पर सरकार में बैठे दल ने तीखा पलटवार किया है। भाजपा के सांसद निशिकांत दुबे ने कहा है कि राहुल गांधी देश में गृहयुद्ध भड़काने की कोशिश कर रहे हैं और सोरोस फाउंडेशन जैसे विदेशी संस्थानों के साथ मिलकर देश को बाँटने का षड्यंत्र रच रहे हैं। दुबे ने यह भी दावा किया कि यदि भारत में जेन-ज़ेड का व्यापक आंदोलन खड़ा हुआ तो कांग्रेस और उसके सहयोगी नेताओं को देश छोड़कर भागना पड़ेगा।
क्या कहा निशिकांत दुबे ने
निशिकांत दुबे ने सोशल-मीडिया पोस्ट और सार्वजनिक मंचों पर आरोप लगाया कि जेन-ज़ेड का अर्थ युवा-पीढ़ी है जो देश और सरकार के विषयों पर निर्णय लेने के लिए खड़ी हो रही है। उन्होंने कहा कि जेन-ज़ेड का यही उत्साह अन्ना-अरविंद हजारे जैसे आंदोलनों का आधार रहा और 2013 के निर्भया-प्रदर्शन जैसी घटनाओं से भी तुलना की जा सकती है। दुबे ने कहा कि नेपाल व बांग्लादेश में जेन-ज़ेड आंदोलनों की पृष्ठभूमि भ्रष्टाचार और परिवारवाद-विरोधी थी और भारत में भी वही स्वर दिखता है — इसलिए अगर जेन-ज़ेड को कांग्रेस भड़का रही है तो वह राष्ट्रविरोधी प्रवृत्ति है। उन्होंने सीधे-सीधे आरोप लगाया कि गांधी-परिवार और कुछ सहयोगी दलों की वंशवादी नीतियों के खिलाफ जेन-ज़ेड खड़ा है और यदि यह आंदोलन बड़ा हुआ तो विपक्षी नेता देश छोड़कर भागेंगे।
भाजपा की रणनीति और समर्थन का इशारा
दुबे ने यह भी कहा कि भाजपा जेन-ज़ेड आंदोलन के साथ है और यदि जनता-आधारित कोई युवा आंदोलन उठता है तो भाजपा उसे रोकने की बात नहीं करेगी, बल्कि उसका समर्थन करेगी — बशर्ते वह संविधान और कानून के दायरे में रहे। उन्होंने सत्ताधीशों के भ्रष्टाचार और वंशवाद के आरोप भी दोहराए और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में युवा-शक्ति को राजनीति में लाने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं।
विपक्ष और चुनाव आयोग पर कांग्रेस का हमला
वहीं, कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी के ‘वोट-चोरी’ वाले दावे और जेन-ज़ेड को लेकर उठी आवाज़ का बचाव करते हुए पार्टी के सांसदों ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर आरोप लगाए हैं कि लोकतंत्र और मतदाता-अधिकारों पर खतरा है। कांग्रेस सांसद-एस सदस्य सुखदेव भगत ने कहा कि देश पूरे परिदृश्य को देख रहा है और चुनाव आयोग अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है — क्या लोकतंत्र बचाना केवल राहुल गांधी की जिम्मेदारी है, यह सवाल सबके सामने है। उन्होंने तर्क दिया कि चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी और मतदाता-सूची से जुड़ी चिंताएँ गंभीर हैं और स्वतंत्र जांच की जरूरत है।
राजनीतिक विमर्श तेज — दावे- counter-दावे जारी
राजनीतिक गलियारे में इस बहस ने नया आयाम ले लिया है। कुछ वरिष्ठ भाजपा नेता ऐसे दावों को ‘देशद्रोह के इरादे’ तक बता रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे लोकतांत्रिक-सक्रियता के रूप में परिभाषित कर रहा है। मीडिया और सोशल-मीडिया पर दोनों तरफ से तीखी बहस चल रही है — एक ओर यह सवाल उठ रहा है कि युवा-शक्ति को राजनीतिक तौर-तरीके से जोड़ना कितना वैध है, तो दूसरी ओर यह कि किसी भी राजनीतिक-संस्कृति में ‘हतियारबंद’ या हिंसक रूप लेना स्वीकार्य नहीं।
क्या है परिप्रेक्ष्य
विश्लेषक कह रहे हैं कि चुनावों के पड़ाव के पहले राज्यों-केन्द्र के बीच और मुख्य पार्टियों के बीच ऐसे बयान तेज़ी से बढ़ते तनाव को दर्शाते हैं। जेन-ज़ेड के प्रति दोनों ही दलों की रणनीतियाँ अब चुनावी विमर्श का मुख्य हिस्सा बन चुकी हैं — कांग्रेस जहां युवा समर्थन जुटाने की बात कर रही है, भाजपा वहीं युवा-आधार का श्रोत अपने पक्ष में जोड़ने और ‘परिवारवाद-भ्रष्टाचार’ के विरुद्ध प्रस्तुति देने में जुटी
________________________________________
क्या पढ़ने वाले के लिए उपयोगी बिंदु
• राहुल गांधी ने Gen-Z को संबोधित कर कहा था कि युवा लोकतंत्र की रक्षा करेंगे और “वोट-चोरी” जैसी घटनाओं का मुकाबला करेंगे।
• भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने इसे गृहयुद्ध उकसाने जैसा बताया और कहा कि अगर Gen-Z का आंदोलन भड़कता है तो विपक्षी नेता देश छोड़ देंगे — भाजपा ने कहा है कि वह ऐसे शांत-लोकतांत्रिक आंदोलनों का समर्थन कर सकती है।
• कांग्रेस नेता सुखदेव भगत ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि देश ‘वोट-चोरी’ जैसी संवेदनशील शिकायतों को देख रहा है और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।





