मुंबई।
मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान सरकारी संपत्ति को हुए भारी नुकसान पर बंबई हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने आंदोलन के अगुवा मनोज जरांगे से पूछा है कि आखिर इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा। अदालत ने साफ कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए, लेकिन सार्वजनिक और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाना गंभीर अपराध है।
आंदोलन पर अदालत की नाराजगी
सोमवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि आंदोलन के दौरान रेल व सड़क यातायात प्रभावित हुआ, बसों व सरकारी वाहनों को नुकसान पहुँचाया गया और इससे आम जनता को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि आंदोलन का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन इसके नाम पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
जरांगे से हलफनामा मांगा
हाईकोर्ट ने जरांगे से कहा कि वे हलफनामा दायर कर बताएं कि आंदोलन के दौरान सरकारी संपत्ति को हुए नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा और उसकी भरपाई कैसे होगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आंदोलनकारियों ने शांति भंग की या संपत्ति को नुकसान पहुँचाया, तो उसकी जिम्मेदारी नेताओं पर भी तय की जा सकती है।
प्रशासन को निर्देश
अदालत ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को भी निर्देश दिए कि वे आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखें और किसी भी तरह की हिंसा या तोड़फोड़ को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएँ। साथ ही अदालत ने कहा कि नुकसान का आकलन कर उसकी रिपोर्ट भी पेश की जाए।
पृष्ठभूमि
ज्ञात हो कि मराठा आरक्षण की मांग को लेकर बीते कई दिनों से महाराष्ट्र में आंदोलन तेज है। जरांगे के नेतृत्व में हजारों लोग सड़कों पर उतरे। कई स्थानों पर प्रदर्शन उग्र होने के कारण बसों और सरकारी भवनों को नुकसान पहुँचा। इसके बाद इस मामले को लेकर याचिका दायर की गई थी, जिस पर अब अदालत ने सख्त रुख दिखाया है।





