लंदन/वॉशिंगटन।
ब्रिटिश समाचार संस्था बीबीसी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़ी एक रिपोर्टिंग को लेकर उठे विवाद के बीच औपचारिक रूप से खेद जताया है। संस्था ने स्वीकार किया कि प्रसारण में संपादन संबंधी त्रुटि हुई, हालांकि साथ ही स्पष्ट किया कि रिपोर्ट में किसी भी प्रकार की मानहानि की मंशा नहीं थी और न ही ट्रंप के खिलाफ कोई गलत आरोप लगाने का उद्देश्य था।
बीबीसी का कहना है कि विवादित प्रसारण के दौरान वीडियो फुटेज और बयान के संपादन में तकनीकी गड़बड़ी के कारण संदर्भ स्पष्ट नहीं हो पाया और इससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई। संस्था ने कहा कि जैसे ही गलती का संज्ञान हुआ, उसे तुरंत सुधार लिया गया। बीबीसी ने कहा कि पत्रकारिता में निष्पक्षता उसके मूल सिद्धांतों में शामिल है और किसी भी व्यक्ति या संस्था की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाना उसका उद्देश्य नहीं होता।
ट्रंप की ओर से इस प्रसारण पर तीखी प्रतिक्रिया आई थी। उन्होंने इसे “भ्रामक” बताते हुए मानहानि का आरोप लगाया था। हालांकि बीबीसी ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि रिपोर्ट तथ्यों पर आधारित थी और editing error ने केवल प्रस्तुति में भ्रम पैदा किया, न कि रिपोर्ट की मूल जानकारी में।
बीबीसी की माफी के बाद मामला कुछ शांत हुआ है, लेकिन इसे लेकर अमेरिकी मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस जारी है। विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना ऐसे समय में हुई है जब राजनीतिक ध्रुवीकरण और मीडिया पर अविश्वास का वातावरण पहले से ही गहरा है, जिससे छोटी त्रुटियां भी बड़े विवाद का रूप ले लेती हैं।
बीबीसी ने कहा है कि वह भविष्य में ऐसी त्रुटियों से बचने के लिए अपने आंतरिक संपादन और वेरिफिकेशन तंत्र को और मजबूत करेगा, ताकि पत्रकारिता की विश्वसनीयता और पारदर्शिता कायम रह सके।





