वॉशिंगटन: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल का सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। इस बीच, अमेरिका के भीतर ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की युद्ध रणनीति को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। पूर्व वरिष्ठ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों और विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस जंग का कोई ‘स्पष्ट उद्देश्य’ (Exit Strategy) नजर नहीं आ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल हवाई हमलों से शासन परिवर्तन (Regime Change) संभव नहीं है और यह संघर्ष अमेरिका को एक और ‘कभी न खत्म होने वाले युद्ध’ (Forever War) में धकेल सकता है।
पूर्व अधिकारियों की चिंता: ‘जीत अब दूर की कौड़ी’
पूर्व अमेरिकी उप-राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (Principal Deputy NSA) जॉन फाइनर और अन्य रणनीतिकारों ने वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है:
- अनिश्चित परिणाम: जॉन फाइनर का मानना है कि युद्ध जिस स्तर पर पहुँच चुका है, वहां से अमेरिका के लिए किसी स्पष्ट ‘जीत’ का दावा करना बेहद मुश्किल है। उनके अनुसार, शुरुआत में मिली बढ़त अब धीरे-धीरे कम होती जा रही है।
- हवाई हमलों की सीमा: विशेषज्ञों ने तर्क दिया है कि इतिहास में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जहाँ केवल हवाई बमबारी से किसी देश की सत्ता बदली गई हो। उन्होंने 2003 के इराक युद्ध का हवाला देते हुए कहा कि जमीन पर सेना उतारने (Boots on the Ground) के भी परिणाम अक्सर अस्थिर ही रहे हैं।
- उद्देश्य पर धुंध: पूर्व अधिकारियों ने सवाल उठाया है कि क्या ट्रंप प्रशासन का लक्ष्य केवल ईरान की परमाणु क्षमता को नष्ट करना है या वे वहां की सत्ता को उखाड़ फेंकना चाहते हैं। रणनीति में इस स्पष्टता के अभाव से भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।
संसद में ट्रंप की घेराबंदी: सांसदों ने उठाए सवाल
वॉशिंगटन में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों ही दलों के सांसदों ने प्रशासन से जवाब मांगा है:
- कांग्रेस की अनुमति: कई सांसदों ने चेतावनी दी है कि यदि यह संघर्ष 60 दिनों से अधिक चलता है, तो राष्ट्रपति को ‘वॉर पावर्स रेजोल्यूशन’ के तहत कांग्रेस से औपचारिक अनुमति लेनी होगी।
- सैनिकों की तैनाती का विरोध: सीनेटर क्रिस मर्फी और अन्य डेमोक्रेट्स ने कहा है कि अमेरिकी जनता एक और विदेशी युद्ध में अपने सैनिकों की जान जोखिम में डालते नहीं देखना चाहती। उन्होंने कहा कि “ज्ञान (परमाणु जानकारी) को बम से खत्म नहीं किया जा सकता।”
- लागत का मुद्दा: ईरान द्वारा कम लागत वाले ‘शाहिद’ ड्रोन के जरिए अमेरिका के महंगे मिसाइल डिफेंस सिस्टम (THAAD और पैट्रियट) को निशाना बनाने से अमेरिका पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
युद्ध का मैदान: क्या है वर्तमान स्थिति?
9 मार्च 2026 तक की स्थिति के अनुसार, यह संघर्ष पूरे क्षेत्र में फैल चुका है:
- तेल ठिकानों पर हमला: इजरायल और अमेरिका ने अब अपना ध्यान ईरान के ऊर्जा ढांचे पर केंद्रित कर दिया है। तेहरान के पास कई तेल डिपो और ईंधन वितरण केंद्रों को निशाना बनाया गया है।
- ईरान का पलटवार: जवाब में ईरान ने यूएई, कुवैत और सऊदी अरब में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। ईरान ने दावा किया है कि उसने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी रडार प्रणालियों को भारी नुकसान पहुँचाया है।
- नेतृत्व का संकट: रिपोर्टों के अनुसार, हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खमेनेई सहित कई शीर्ष कमांडर मारे जा चुके हैं, जिससे ईरान में नेतृत्व का बड़ा शून्य पैदा हो गया है।





