नई दिल्ली/ढाका।
संयुक्त राष्ट्र ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों, विशेषकर हिंदू और ईसाई धर्मावलंबियों के खिलाफ बढ़ते हमलों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। इस मुद्दे को हाल ही में हुई बैठक में उठाया गया, जिसमें गुइमारा कांड को विशेष रूप से उल्लेखनीय बताया गया।
गुइमारा कांड में कथित तौर पर धार्मिक आधार पर हिंसा और सामाजिक उत्पीड़न के मामले सामने आए थे, जिससे न केवल स्थानीय समुदाय में भय का माहौल बना, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मानवाधिकार संरक्षण की गंभीर चिंता पैदा हुई। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया कि बांग्लादेश सरकार को अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।
संयुक्त राष्ट्र ने बांग्लादेश से अपील की है कि वह धार्मिक और सांस्कृतिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ होने वाले किसी भी प्रकार के हिंसात्मक कृत्य को रोकने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने में शीघ्रता दिखाए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि धार्मिक स्वतंत्रता और सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल आंतरिक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों का भी हिस्सा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गुइमारा कांड जैसे घटनाक्रम बांग्लादेश की सामाजिक स्थिरता और धार्मिक सह-अस्तित्व की नींव पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आलोचना से बांग्लादेश की वैश्विक छवि भी प्रभावित हो सकती है।
इस मामले में बांग्लादेश सरकार ने प्रारंभिक प्रतिक्रिया में कहा है कि दोषियों के खिलाफ जांच जारी है और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि यह पर्याप्त नहीं है और प्रभावी सुरक्षा तंत्र और लंबी अवधि की नीतिगत कार्रवाई की आवश्यकता है।





