इस्लामाबाद/वॉशिंगटन: पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान की धरती के नीचे छिपे अरबों डॉलर के खजाने पर अब अमेरिका की नजर है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन ने बलूचिस्तान की प्रसिद्ध रेको डिक (Reko Diq) खदान से सोना और तांबा निकालने के लिए 1.3 बिलियन डॉलर (लगभग 10,800 करोड़ रुपये) के भारी-भरकम निवेश को मंजूरी दे दी है। यह निवेश अमेरिका की नई वैश्विक रणनीति ‘प्रोजेक्ट वॉल्ट’ (Project Vault) का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य दुनिया भर में दुर्लभ खनिजों और धातुओं की सप्लाई चेन पर अपना नियंत्रण मजबूत करना है। इस समझौते को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की कूटनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है, जिन्होंने पिछले साल वॉशिंगटन यात्रा के दौरान ट्रंप को खनिज नमूनों का तोहफा भेंट किया था।
क्या है रेको डिक और ‘प्रोजेक्ट वॉल्ट’?
रेको डिक दुनिया के सबसे बड़े अविकसित सोना और तांबा भंडारों में से एक है। अमेरिका के EXIM बैंक द्वारा वित्तपोषित यह प्रोजेक्ट रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है:
- खजाने का आकार: भू-वैज्ञानिक अनुमानों के अनुसार, इस खदान में लगभग 5.9 बिलियन टन अयस्क है, जिसमें 41.5 मिलियन औंस सोना और भारी मात्रा में तांबा मौजूद है।
- प्रोजेक्ट वॉल्ट: यह ट्रंप प्रशासन की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके तहत अमेरिका 10 बिलियन डॉलर की लागत से अपना ‘रणनीतिक खनिज रिजर्व’ बना रहा है। दिलचस्प बात यह है कि रेको डिक इस पूरे प्रोजेक्ट के तहत अमेरिका के बाहर किया गया एकमात्र विदेशी निवेश है।
शहबाज-मुनीर की ‘मिनरल डिप्लोमेसी’
इस डील की नींव सितंबर 2025 में रखी गई थी, जब पाकिस्तानी नेतृत्व ने अमेरिका का दौरा किया था:
- ट्रंप को दिया ‘खजाना’: रिपोर्ट्स के अनुसार, पीएम शहबाज और जनरल मुनीर ने राष्ट्रपति ट्रंप को एक लकड़ी के बॉक्स में पाकिस्तान के दुर्लभ खनिजों के नमूने पेश किए थे, जिसने अमेरिका की रुचि इस क्षेत्र में जगाई।
- चीन को झटका: बलूचिस्तान में अब तक चीनी कंपनियों का दबदबा रहा है, लेकिन अमेरिका के इस बड़े निवेश से पाकिस्तान की चीन पर निर्भरता कम होगी और क्षेत्र में अमेरिकी प्रभाव बढ़ेगा।
- रोजगार के अवसर: अमेरिकी दूतावास के अनुसार, इस निवेश से बलूचिस्तान में करीब 7,500 नए रोजगार पैदा होंगे, जबकि अमेरिका में भी 6,000 नौकरियों के अवसर सृजित होंगे।
चुनौतियां और सुरक्षा चिंताएं
भारी निवेश के बावजूद, यह प्रोजेक्ट जोखिमों से मुक्त नहीं है:
- अलगाववादी हमले: बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) जैसे समूह लंबे समय से विदेशी निवेश और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन का विरोध कर रहे हैं। यहां अक्सर चीनी इंजीनियरों और परियोजनाओं पर हमले होते रहे हैं।
- मानवाधिकारों का सवाल: बलूच कार्यकर्ताओं का आरोप है कि स्थानीय जनता की सहमति के बिना उनके संसाधनों को बेचा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थानीय लोगों को लाभ नहीं मिला, तो विद्रोह और भड़क सकता है।
निष्कर्ष: पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था को तिनके का सहारा
विदेशी मुद्रा भंडार के संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए यह 1.3 बिलियन डॉलर का निवेश किसी संजीवनी से कम नहीं है। 2028 तक इस खदान से उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है, जिससे पाकिस्तान को सालाना अरबों डॉलर का निर्यात राजस्व प्राप्त हो सकता है।
“यह साझेदारी केवल व्यापार नहीं, बल्कि एक ‘विन-विन’ मॉडल है। इससे बलूचिस्तान का आर्थिक चेहरा बदलेगा और अमेरिका को महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित सप्लाई मिलेगी।” — नताली बेकर, अमेरिकी राजनयिक





