हल्द्वानी (नैनीताल): हल्द्वानी के चर्चित बनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद प्रशासन ने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। रेलवे की करीब 31 हेक्टेयर भूमि पर बसे परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत पात्रता जांच का काम युद्ध स्तर पर शुरू हो गया है। प्रशासन और विधिक सेवा प्राधिकरण की टीमें अब क्षेत्र में घर-घर जाकर आवेदन फॉर्म वितरित कर रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2026 के अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि रेलवे की जमीन पर कब्जा जारी नहीं रखा जा सकता, लेकिन मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए पात्र परिवारों का पुनर्वास अनिवार्य है। कोर्ट ने निर्देश दिए थे कि 31 मार्च 2026 तक सभी प्रभावित परिवारों की पात्रता का निर्धारण कर लिया जाए। इसी क्रम में 19 मार्च से 31 मार्च के बीच क्षेत्र में विशेष शिविर (कैंप) भी लगाए जा रहे हैं।
सर्वे और फॉर्म वितरण की मुख्य बातें:
- घर-घर दस्तक: राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ सामाजिक कार्यकर्ता और विधिक सेवा प्राधिकरण (USLSA) के विशेषज्ञ घर-घर जाकर लोगों को योजना की शर्तों की जानकारी दे रहे हैं।
- पात्रता के मानक: पीएम आवास योजना का लाभ उन्हीं परिवारों को मिलेगा जिनकी वार्षिक आय 3 लाख रुपये से कम है और जिनके पास देश में कहीं भी अपना पक्का मकान नहीं है।
- दस्तावेजों की जांच: आवेदकों को पहचान पत्र, आय प्रमाण पत्र और निवास से जुड़े साक्ष्य देने होंगे, जिसकी जांच के बाद ही उन्हें ‘पात्र’ घोषित किया जाएगा।
- 6 विशेष शिविर: बनभूलपुरा के विभिन्न छह स्थानों पर शिविर आयोजित किए गए हैं ताकि लोग आसानी से अपने फॉर्म जमा कर सकें और तकनीकी सहायता प्राप्त कर सकें।
पुनर्वास की चुनौती और भविष्य
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में लगभग 5,300 परिवार प्रभावित हो सकते हैं। यदि ये परिवार पात्र पाए जाते हैं, तो सरकार को उनके आवास के लिए लगभग 376 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं। जो लोग अपात्र होंगे या जिनके पास पट्टे की वैध भूमि होगी, उनके लिए अलग से मुआवजे या नीति पर विचार किया जाएगा।
महत्वपूर्ण तिथि: इस पूरी सर्वे प्रक्रिया और पात्रता सूची की रिपोर्ट 28 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट में पेश की जानी है, जिस दिन मामले की अगली सुनवाई निर्धारित है।





