Saturday, February 14, 2026

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बनभूलपुरा–रेलवे भूमि अतिक्रमण: जिम्मेदारी किसकी? सवालों के घेरे में तंत्र

हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे भूमि पर अतिक्रमण का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। लगभग 50 वर्षों से जारी यह कब्जा अब सवालों के घेरे में है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण पनपने दिया कैसे गया और इसके लिए जिम्मेदार कौन है?

रेलवे का दावा है कि क्षेत्र में 31 हेक्टेयर भूमि उसकी है, जबकि राज्य सरकार भी इसके एक हिस्से पर अपना दावा जताती है। इसी भूमि पर वर्षों से पहले झोपड़ियाँ, फिर कच्चे और बाद में पक्के मकान तक बनते चले गए। राजनीतिक हित साधने की मंशा से यहां बिजली, पानी, सड़क तथा अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती रहीं। वोटर कार्ड तक बनवाए गए, जिससे अतिक्रमण को वैधता का स्वरूप मिलता गया।

आज हालत यह है कि रेलवे के अनुसार 4365 घर, सरकारी स्कूल, धार्मिक स्थल और स्वास्थ्य केंद्र इस क्षेत्र में मौजूद हैं, जहां लगभग 50 हजार लोग रहते हैं। रेलवे स्टेशन के एक ओर गौला नदी का कटाव और दूसरी ओर अतिक्रमण ने नई ट्रेनों के संचालन को प्रभावित किया है।

2007 और 2016 में हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए, जिसके बाद कुछ सीमित कार्रवाई हुई, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ा। अब यह प्रकरण सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्षों की प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक संरक्षण ने इस समस्या को आज की गंभीर स्थिति तक पहुँचा दिया है।

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