नई दिल्ली/हल्द्वानी: हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे की भूमि पर हुए अतिक्रमण को लेकर चल रहे लंबे कानूनी विवाद में आज सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद तल्ख और महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि जमीन सरकार की है, तो वहां से कब्जा हर हाल में हटना चाहिए। कोर्ट के इस कड़े रुख से उन हजारों लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं जो वर्षों से इस विवादित भूमि पर रह रहे हैं। अदालत ने साफ किया कि सार्वजनिक संपत्तियों पर अवैध कब्जे को लंबे समय तक बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणियां
जस्टिस की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन और कब्जाधारकों दोनों के लिए स्पष्ट संकेत दिए:
- “सरकारी जमीन पर हक नहीं”: अदालत ने कहा कि केवल लंबे समय तक रहने मात्र से किसी को सरकारी जमीन पर मालिकाना हक नहीं मिल जाता। यदि रिकॉर्ड में जमीन रेलवे या सरकार की है, तो उसे खाली कराया जाना अनिवार्य है।
- अतिक्रमण पर कड़ाई: कोर्ट ने टिप्पणी की कि विकास परियोजनाओं (जैसे रेलवे विस्तार) के लिए सरकारी जमीन का खाली होना राष्ट्रहित में जरूरी है।
- संतुलन की जरूरत: हालांकि कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया, लेकिन साथ ही यह भी संकेत दिया कि मानवीय पक्ष को देखते हुए पुनर्वास की संभावनाओं पर भी विचार किया जा सकता है, बशर्ते जमीन की वैधानिकता स्पष्ट हो।
क्या है बनभूलपुरा विवाद?
यह मामला उत्तराखंड के हल्द्वानी में रेलवे स्टेशन के पास स्थित लगभग 29 एकड़ भूमि से जुड़ा है:
- हजारों परिवार प्रभावित: रेलवे का दावा है कि बनभूलपुरा की गफूर बस्ती सहित कई इलाकों में लगभग 4,000 से अधिक परिवारों ने अवैध कब्जा कर रखा है।
- हाईकोर्ट का आदेश: इससे पहले उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अतिक्रमण को तत्काल हटाने और जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग करने का आदेश दिया था, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी थी।
- रेलवे की दलील: रेलवे का कहना है कि इस जमीन के न होने के कारण हल्द्वानी रेलवे स्टेशन का विस्तार और आधुनिकीकरण रुका हुआ है।
राजनीतिक और सामाजिक हलचल
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद हल्द्वानी में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है:
- स्थानीय निवासियों में डर: कोर्ट की तल्खी के बाद अब स्थानीय लोगों को घर उजाड़े जाने का डर सताने लगा है। लोग अब भी अपने पुराने दस्तावेजों के आधार पर मालिकाना हक का दावा कर रहे हैं।
- प्रशासन की तैयारी: सुप्रीम कोर्ट के रुख को देखते हुए राज्य सरकार और रेलवे प्रशासन ने अपनी कानूनी दलीलों को और मजबूत करना शुरू कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि वे कोर्ट के हर निर्देश का पालन करने के लिए तैयार हैं।





