गोपेश्वर। बदरीनाथ धाम में 19 और 20 सितंबर को आयोजित देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और तेज आवाज में संगीत को लेकर उठे सवालों के बीच आयोजन की जिम्मेदारी को लेकर पर्यटन विभाग और सेना के बीच स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। पर्यटन विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
फेस्टिवल का आयोजन बदरीनाथ स्थित टूरिस्ट अराइवल प्लाजा में किया गया था। इसकी थीम ‘हमारी विरासत, हमारा भविष्य’ थी। कार्यक्रम सेना के ऑपरेशन सद्भावना के तहत पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजित हुआ था। आयोजन में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ संगीत कार्यक्रम भी हुए। बाद में सोशल मीडिया पर कार्यक्रम के वीडियो सामने आने के बाद कुछ प्रस्तुतियों और तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम को लेकर आपत्ति जताई गई।
सेना से मांगा गया स्पष्टीकरण
विवाद के बाद चमोली के जिलाधिकारी ने गढ़वाल स्काउट्स के कमांडिंग ऑफिसर को नोटिस जारी कर कार्यक्रम की अनुमति और तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम के इस्तेमाल को लेकर स्पष्टीकरण मांगा। प्रशासन ने कहा कि बदरीनाथ धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है और इस प्रकार के आयोजन से नियमित पूजा-अर्चना प्रभावित हो सकती है।
प्रशासन के दस्तावेजों से सामने आई अलग तस्वीर
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, पर्यटन विभाग आयोजन में महत्वपूर्ण भागीदार था। वहीं, अन्य रिपोर्टों में चमोली प्रशासन के दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया गया है कि कार्यक्रम की तैयारियों के लिए जिला स्तर पर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई थी। 8 सितंबर के आदेश में मुख्य विकास अधिकारी को आयोजन का नोडल अधिकारी बनाया गया था और 10 सितंबर को व्यवस्थाओं पर बैठक भी बुलाई गई थी।
60 लाख रुपये से अधिक खर्च
रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष फेस्टिवल पर 60 लाख रुपये से अधिक खर्च होने की बात सामने आई है। आयोजन के लिए सेना के वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम से राशि मिलने की बात कही गई है, जबकि पर्यटन विभाग की ओर से भी बजट दिए जाने का उल्लेख है।
विवाद के बीच आयोजन की जिम्मेदारी और अनुमति को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग बढ़ रही है। सेना की ओर से मामले में औपचारिक जवाब की प्रक्रिया जारी बताई गई है।





