नई दिल्ली/मिजोरम (20 मार्च, 2026): भारतीय सुरक्षा एजेंसियों (NIA) ने विदेशी खुफिया इनपुट के आधार पर एक बेहद संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय साजिश का भंडाफोड़ किया है। रूसी सुरक्षा एजेंसियों से मिली गुप्त सूचना के बाद एनआईए ने मिजोरम सीमा और कोलकाता हवाई अड्डे से अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप है कि ये टूरिस्ट वीजा की आड़ में भारत-म्यांमार सीमा पर आतंकी समूहों को हथियारों की ट्रेनिंग दे रहे थे और भारत के खिलाफ विद्रोह भड़काने की साजिश रच रहे थे।
मास्टरमाइंड मैथ्यू डाइक और उसका गिरोह: कैसे हुई गिरफ्तारी?
इस पूरे नेटवर्क का संचालन अमेरिकी सुरक्षा फर्म ‘सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल’ (SOLI) के संस्थापक मैथ्यू डाइक द्वारा किया जा रहा था:
- कोलकाता में दबोचा गया: खुद को युद्ध विशेषज्ञ बताने वाले मैथ्यू डाइक को 13 मार्च को कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उस समय गिरफ्तार किया गया, जब वह भागने की फिराक में था।
- यूक्रेनी नागरिकों की पहचान: डाइक के साथ छह यूक्रेनी नागरिकों—हुरबा पेट्रो, स्लिवियाक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफनकीव मारियन, होनचारुक मैक्सिम और का मिंस्की विक्टर को भी हिरासत में लिया गया है।
- NIA की रडार पर 8 अन्य: सूत्रों के मुताबिक, यह 14-15 लोगों का एक बड़ा गिरोह था। एनआईए अब आठ अन्य यूक्रेनी नागरिकों की तलाश कर रही है जो फिलहाल फरार हैं।
साजिश का तरीका: टूरिस्ट वीजा और ड्रोन नेटवर्क
जांच में खुलासा हुआ है कि इन विदेशी नागरिकों ने भारत की सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाने के लिए एक सोची-समझी रणनीति अपनाई थी:
- वीजा का दुरुपयोग: ये लोग टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे, लेकिन पर्यटन के बजाय अवैध रूप से मिजोरम के प्रतिबंधित क्षेत्रों में दाखिल हुए और वहां से म्यांमार सीमा पार की।
- ड्रोन और आधुनिक हथियार: यह गिरोह यूरोप से बड़े पैमाने पर अत्याधुनिक ड्रोन भारत पहुंचा रहा था। एनआईए को अंदेशा है कि इन ड्रोनों का इस्तेमाल भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में सक्रिय विद्रोही समूहों द्वारा किया जाना था।
- हथियारों का प्रशिक्षण: ये विदेशी विशेषज्ञ एके-47 राइफलों से लैस अज्ञात सशस्त्र ऑपरेटरों के संपर्क में थे और प्रतिबंधित भारतीय विद्रोही संगठनों को गुरिल्ला युद्ध का प्रशिक्षण दे रहे थे।
रूसी एजेंसियों की मदद और NIA का अदालत में बयान
इस मामले में रूस की खुफिया एजेंसियों ने भारत के साथ महत्वपूर्ण डेटा साझा किया था, जिससे इस नेटवर्क का समय रहते पता चल सका। एनआईए ने अदालत को सूचित किया है कि:
- अवैध गतिविधियां: आरोपी न केवल म्यांमार के सशस्त्र गुटों की मदद कर रहे थे, बल्कि भारतीय विद्रोही संगठनों को भी सामरिक और तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे थे।
- आतंकी नेटवर्क: जांचकर्ताओं का मानना है कि इस गिरोह का मकसद पूर्वोत्तर भारत में अस्थिरता पैदा करना और आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देना था।





