मनीला। नेपाल और फ्रांस में हालिया राजनीतिक उथल-पुथल के बाद अब फिलीपींस में भी सरकार के खिलाफ व्यापक आक्रोश देखने को मिल रहा है। राजधानी मनीला समेत कई शहरों में बीते सप्ताहांत हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और राष्ट्रपति फर्डिनेंड “बोंगबोंग” मार्कोस जूनियर की सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने महंगाई, बेरोजगारी और कथित भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर केंद्र को घेरते हुए जवाबदेही की मांग की।
बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी बना मुख्य मुद्दा
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लगातार बढ़ रही खाद्य वस्तुओं और ईंधन की कीमतों ने आम जनता का जीवन कठिन बना दिया है। छात्रों और युवाओं ने बेरोजगारी दर को लेकर चिंता जताई, वहीं श्रमिक संगठनों ने सरकार की नीतियों को आम आदमी के खिलाफ बताया।
राष्ट्रपति की अपील
तेज होते प्रदर्शनों के बीच राष्ट्रपति मार्कोस ने सोमवार को राष्ट्र को संबोधित करते हुए लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा, “लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति का सम्मान किया जाता है, लेकिन हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। सरकार जनता की चिंताओं को सुन रही है और जल्द ठोस कदम उठाएगी।”
पुलिस-प्रदर्शनकारियों में झड़प
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मनीला विश्वविद्यालय क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई। कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। हालांकि, पुलिस ने दावा किया कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए न्यूनतम बल का प्रयोग किया गया।
विपक्ष के आरोप
विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह जनता की वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए विदेश नीति और सुरक्षा मुद्दों को तूल दे रही है। एक विपक्षी सांसद ने कहा, “लोग रोज़मर्रा की मुश्किलों से जूझ रहे हैं, लेकिन सरकार जवाबदेही से भाग रही है।”
वैश्विक संदर्भ
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेपाल और फ्रांस के बाद फिलीपींस में सरकार विरोधी प्रदर्शनों का उभार इस बात का संकेत है कि एशिया और यूरोप के कई देशों में जन असंतोष गहराता जा रहा है। आर्थिक संकट, असमानता और राजनीतिक नेतृत्व पर भरोसे की कमी इन प्रदर्शनों की मुख्य वजह मानी जा रही है।





