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फिर बरपा बादल का कहर: आपदाओं से छलनी उत्तराखंड, मलबे में दबी ज़िंदगियाँ

देहरादून। पहाड़ों की रफ्तार से गिरती बारिश एक बार फिर उत्तराखंड पर कहर बनकर टूटी। देर रात हुए बादल फटने की घटना ने कई इलाकों में तबाही मचा दी। तेज़ बारिश और अचानक आए पानी के सैलाब ने घरों, दुकानों और खेतों को बहा दिया। कई वाहन मलबे में दब गए और लोगों की ज़िंदगियाँ क्षणभर में उजड़ गईं। प्रभावित इलाकों में हालात भयावह हैं और राहत-बचाव दल चौबीसों घंटे जुटे हैं।

मलबे में समाई बस्तियाँ
पहाड़ी इलाकों में हुई मूसलधार बारिश से पहाड़ों से भारी मात्रा में मलबा नीचे आ गया। देखते ही देखते कई गाँव और कस्बों की गलियाँ मिट्टी और पत्थरों में तब्दील हो गईं। कई मकान जमींदोज हो गए जबकि दुकानों के शटर पानी और मलबे के दबाव से टूटकर बिखर गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि “इतनी बड़ी आपदा उन्होंने वर्षों में नहीं देखी।”

जिंदगी हुई बेबस
जहाँ कल तक चहल-पहल थी, वहाँ अब वीरानी और मातम पसरा हुआ है। लोग अपनी बची-खुची संपत्ति ढूँढ़ने के लिए मलबे में खुदाई करने को मजबूर हैं। कई परिवारों के पास सिर छुपाने तक की जगह नहीं बची। बिजली, पानी और संचार सुविधाएँ ठप हो गई हैं, जिससे हालात और बिगड़ गए हैं।

राहत और बचाव अभियान
एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पुलिस की टीमें घटनास्थल पर लगातार राहत कार्य चला रही हैं। अब तक कई लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, लेकिन कई अब भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में आपातकालीन शिविर बनाए हैं, जहाँ विस्थापित परिवारों को अस्थायी ठिकाने और भोजन दिया जा रहा है।

पहाड़ों पर लगातार आपदाएँ
उत्तराखंड पिछले कुछ वर्षों से प्राकृतिक आपदाओं का केंद्र बना हुआ है। कभी बादल फटना, तो कभी भूस्खलन और बाढ़ – हर बार पहाड़ और उसके लोग गंभीर चोटें झेल रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि अनियंत्रित निर्माण, जलवायु परिवर्तन और वनों की अंधाधुंध कटाई ने इस खतरे को और बढ़ा दिया है।

सरकार की अपील
मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया और पीड़ितों को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि आपदा से प्रभावित परिवारों को तुरंत राहत राशि दी जाएगी और पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि अफवाहों से बचें और सतर्क रहते हुए प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

तस्वीरों में तबाही का मंजर
घटना के बाद आई तस्वीरों में सड़कों पर फैला मलबा, टूटी हुई गाड़ियाँ, गिरे मकान और बेसहारा लोग साफ दिखाई दे रहे हैं। जिन जगहों पर कभी जीवन धड़कता था, वहाँ अब केवल तबाही और खामोशी नजर आ रही है।

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