उत्तराखंड में स्कूल प्रार्थना व्यवस्था को और सुव्यवस्थित तथा सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग ने एक अहम निर्णय लिया है। शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार अब राज्य के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में प्रतिदिन ‘वंदे मातरम’ का सामूहिक गायन अनिवार्य होगा। आदेश के बाद राज्य के समस्त जिला शिक्षा अधिकारियों को इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने को कहा गया है।
निदेशानुसार, प्रत्येक स्कूल में सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ का गायन किया जाएगा। इसे अन्य निर्धारित प्रार्थनाओं और गतिविधियों के साथ अनिवार्य रूप से शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कदम विद्यार्थियों में राष्ट्रीय चेतना, अनुशासन और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
यह निर्देश राज्य के अंतर्गत संचालित सरकारी, सहायता प्राप्त, निजी, सीबीएसई, आईसीएसई और सभी प्रकार के मान्यता प्राप्त विद्यालयों पर समान रूप से लागू होगा। स्कूल प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रार्थना सभा में शिक्षक तथा छात्र दोनों पूर्ण अनुशासन के साथ सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत का गायन करें।
शिक्षा निदेशक ने सभी जिलों के डीईओ को निर्देश दिया है कि वे स्कूलों में इस व्यवस्था के क्रियान्वयन की नियमित मॉनिटरिंग करें। यदि कहीं निर्देशों का पालन नहीं होता है, तो संबंधित संस्थान के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है। इसके साथ ही विद्यालयों से समय-समय पर अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी जाएगी।
शिक्षा विभाग का मानना है कि प्रार्थना सभा बच्चों के दैनिक विद्यालयीन जीवन की महत्वपूर्ण इकाई है। इसमें ‘वंदे मातरम’ को शामिल करने से छात्रों में देशभक्ति की भावना, राष्ट्रीय अस्मिता और सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान को और बढ़ावा मिलेगा।
शिक्षकों का कहना है कि यह कदम विद्यार्थियों में अनुशासन और सामूहिकता की भावना को भी मजबूत करेगा।
निर्देश जारी होने के बाद कई स्कूलों में तैयारी शुरू हो गई है। कुछ संस्थानों ने छात्रों को राष्ट्रगीत का अभ्यास कराने की विशेष व्यवस्था की है, जबकि कई स्कूलों ने इसे अपनी दैनिक प्रार्थना सूची में औपचारिक रूप से जोड़ दिया है।
शिक्षा विभाग के इस कदम को राज्य में शिक्षा–सांस्कृतिक समन्वय को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।





