बेंगलुरु: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष एस. सोमनाथ ने भारत के अंतरिक्ष दृष्टिकोण को लेकर एक बड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए इसरो प्रमुख ने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की नींव अन्य देशों के साथ प्रतिस्पर्धा करने पर नहीं, बल्कि ‘वैश्विक सहयोग’ और मानवता के कल्याण पर टिकी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अंतरिक्ष को शक्ति प्रदर्शन या वर्चस्व की लड़ाई के मैदान के रूप में नहीं देखता, बल्कि इसे एक ऐसी साझा संपदा मानता है जहां आपसी तालमेल से ही ब्रह्मांड के रहस्यों को सुलझाया जा सकता है।
प्रमुख बिंदु: प्रतिस्पर्धा से परे भारत की दृष्टि
एस. सोमनाथ ने अपने संबोधन में भारतीय अंतरिक्ष यात्रा के दर्शन को कई महत्वपूर्ण बिंदुओं के माध्यम से समझाया:
- मानवता के लिए विज्ञान: उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के मिशन (जैसे चंद्रयान और मंगलयान) केवल रिकॉर्ड बनाने के लिए नहीं, बल्कि वैज्ञानिक डेटा साझा करने और समाज की समस्याओं का समाधान खोजने के लिए हैं।
- सस्ती और सुलभ तकनीक: इसरो प्रमुख ने कहा कि भारत ने कम लागत में जटिल मिशनों को सफल बनाकर दुनिया को दिखाया है कि अंतरिक्ष तकनीक केवल अमीर देशों तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
- साझा संसाधनों का उपयोग: उन्होंने वैश्विक अंतरिक्ष एजेंसियों से अपील की कि वे संसाधनों की होड़ के बजाय ज्ञान और बुनियादी ढांचे के आदान-प्रदान पर ध्यान केंद्रित करें।
अंतरिक्ष मलबे और सुरक्षा पर चिंता
इसरो प्रमुख ने अंतरिक्ष में बढ़ती भीड़ और वहां होने वाली सैन्य गतिविधियों को लेकर दुनिया को आगाह भी किया:
- युद्ध क्षेत्र न बने अंतरिक्ष: उन्होंने चिंता व्यक्त की कि अंतरिक्ष का उपयोग सामरिक लाभ के लिए करना पूरी दुनिया के लिए खतरनाक हो सकता है। इसे शांतिपूर्ण कार्यों के लिए ही सुरक्षित रखा जाना चाहिए।
- अंतरिक्ष मलबा (Space Debris): सोमनाथ ने कहा कि बढ़ते उपग्रहों और उनके मलबे से भविष्य के मिशनों के लिए खतरा पैदा हो रहा है। इसके लिए सभी देशों को मिलकर ‘स्पेस ट्रैफिक मैनेजमेंट’ पर काम करना होगा।
- सस्टेनेबल स्पेस: भारत का लक्ष्य ‘जीरो डिब्रिस’ (शून्य मलबा) मिशन की ओर बढ़ना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए अंतरिक्ष साफ और सुलभ रहे।
अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का नया युग
भारत वर्तमान में कई बड़े अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स का हिस्सा है, जो इसरो प्रमुख के ‘सहयोग’ वाले बयान की पुष्टि करते हैं:
- निसार (NISAR) मिशन: इसरो और नासा (NASA) मिलकर एक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह बना रहे हैं, जो जलवायु परिवर्तन की निगरानी करेगा।
- गगनयान की ट्रेनिंग: भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को रूस और अमेरिका द्वारा प्रशिक्षण में सहयोग दिया जा रहा है।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी: उन्होंने बताया कि अब भारत अपने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए भी खोल रहा है, जिससे वैश्विक निवेश और नवाचार के रास्ते खुलेंगे।





