कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य की पेयजल परियोजनाओं में अनियमितताओं को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। सरकार ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जहां भी गड़बड़ी के प्रमाण मिलें, वहां 15 दिनों के भीतर एफआईआर दर्ज कर दोषियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए। इस संबंध में सभी जिलों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
सरकार का कहना है कि पेयजल जैसी महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी परियोजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही, भ्रष्टाचार या वित्तीय अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समीक्षा के दौरान कई परियोजनाओं में निर्माण कार्य, गुणवत्ता और वित्तीय प्रक्रियाओं से जुड़ी शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद यह सख्त फैसला लिया गया।
निर्देशों के अनुसार, जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को लंबित मामलों की तत्काल जांच पूरी करने, जिम्मेदार अधिकारियों एवं ठेकेदारों की पहचान करने तथा कानूनी कार्रवाई शुरू करने को कहा गया है। यदि किसी स्तर पर भ्रष्टाचार या सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पेयजल परियोजनाओं की गुणवत्ता और समयबद्ध क्रियान्वयन में किसी प्रकार की कोताही स्वीकार नहीं की जाएगी। अधिकारियों को परियोजनाओं की नियमित निगरानी करने और निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
राज्य सरकार का मानना है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकता है। ऐसे में योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आवश्यक है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में अन्य परियोजनाओं का भी ऑडिट कराया जाएगा और जहां भी अनियमितताएं मिलेंगी, वहां इसी प्रकार की कार्रवाई की जाएगी।





