देहरादून। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) पेपर लीक मामले में आरोपी सुरेंद्र की चालाकी आखिरकार उसी पर भारी पड़ गई। उसने परीक्षा प्रक्रिया में धांधली करने और फर्जीवाड़ा रचने की कोशिश तो कर ली, लेकिन एक छोटी-सी भूल ने पूरे खेल का भंडाफोड़ कर दिया।
जांच अधिकारियों के अनुसार, सुरेंद्र ने दस्तावेजों में उत्तराखंड का संक्षिप्त नाम पुराने अंदाज में ‘यूए’ (उत्तरांचल) लिख दिया, जबकि वर्ष 2007 में राज्य का नाम बदलकर उत्तराखंड (UK) कर दिया गया था। यही लापरवाही सुरेंद्र की असलियत सामने ले आई और उसके खिलाफ पुख्ता सबूत बन गई।
सूत्रों का कहना है कि आरोपी ने पेपर लीक कर अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूलने की योजना बनाई थी। दस्तावेजों की जांच में जब ‘यूए’ का उल्लेख मिला तो जांच एजेंसियों को शक हुआ। गहन पड़ताल में यह साफ हो गया कि सुरेंद्र ने पुराने दस्तावेजों की नकल कर फर्जीवाड़ा रचा था।
जांच टीम ने बताया कि यह मामला न सिर्फ धोखाधड़ी का है, बल्कि इससे राज्य के हजारों बेरोजगार युवाओं का भविष्य दांव पर लग गया। सुरेंद्र की इस गलती ने जहां पूरे गैंग की पोल खोली, वहीं यह भी साबित कर दिया कि अपराध कितना भी चालाकी से रचा जाए, एक छोटी भूल उसे उजागर कर सकती है।
राज्य सरकार ने पेपर लीक प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए पहले ही सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।





