Saturday, January 31, 2026

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पूर्णागिरि धाम में अब ‘उड़ान’ भरेंगे श्रद्धालु: हेली सेवा से जोड़ने की तैयारी शुरू; मंदिर के पास बनेगा आधुनिक हेलीपैड, बुजुर्गों और बीमारों को मिलेगी बड़ी राहत

टनकपुर/चंपावत: उत्तर भारत के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल मां पूर्णागिरि धाम आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए एक खुशखबरी है। उत्तराखंड सरकार ने दुर्गम पहाड़ियों पर स्थित इस शक्तिपीठ को हेलीकॉप्टर सेवा से जोड़ने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। वर्तमान में श्रद्धालुओं को मुख्य मंदिर तक पहुंचने के लिए लंबी और कठिन पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने मंदिर के समीप एक स्थायी हेलीपैड बनाने का निर्णय लिया है। इस सेवा के शुरू होने से न केवल यात्रा का समय बचेगा, बल्कि बुजुर्गों, दिव्यांगों और गंभीर रूप से बीमार श्रद्धालुओं के लिए माता के दर्शन करना काफी आसान हो जाएगा।

हेलीपैड निर्माण और सर्वेक्षण की प्रक्रिया

प्रशासन ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए प्रारंभिक चरण की कार्रवाई तेज कर दी है:

  • स्थान का चयन: नागरिक उड्डयन विभाग और जिला प्रशासन की टीम ने मंदिर परिसर के आसपास उपयुक्त समतल भूमि का निरीक्षण किया है। सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए हेलीपैड के लिए स्थान चिह्नित किया जा रहा है।
  • तकनीकी टीम का सर्वे: जल्द ही विशेषज्ञों की एक तकनीकी टीम लैंडिंग और टेक-ऑफ की संभावनाओं की जांच करेगी। पहाड़ियों की ऊंचाई और हवा के दबाव का आकलन कर सुरक्षा रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
  • कनेक्टिविटी: योजना के अनुसार, इस हेली सेवा को टनकपुर या आसपास के अन्य प्रमुख शहरों से जोड़ा जा सकता है, जिससे श्रद्धालुओं को सीधे धाम तक पहुंचने का विकल्प मिले।

पर्यटन और स्थानीय आर्थिकी को मिलेगा बढ़ावा

पूर्णागिरि धाम में हेली सेवा शुरू होने से क्षेत्र की तस्वीर बदलने की उम्मीद है:

  1. तीर्थाटन में वृद्धि: सुगम यातायात सुविधा मिलने से दक्षिण भारत और अन्य दूरस्थ राज्यों से आने वाले पर्यटकों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होने की संभावना है।
  2. रोजगार के अवसर: हेलीपैड और उसके आसपास बुनियादी ढांचे के विकास से स्थानीय युवाओं के लिए टैक्सी संचालन, गाइड और होमस्टे जैसे नए रोजगार सृजित होंगे।
  3. धार्मिक पर्यटन सर्किट: इस सेवा को भविष्य में केदारनाथ और बद्रीनाथ की तर्ज पर एक बड़े धार्मिक पर्यटन सर्किट का हिस्सा बनाया जा सकता है।

श्रद्धालुओं की पुरानी मांग होगी पूरी

सालों से श्रद्धालु और स्थानीय व्यापारी इस धाम को हवाई सेवा से जोड़ने की मांग कर रहे थे:

  • पैदल चढ़ाई की चुनौती: वर्तमान में टनकपुर से ठुलीगाड़ तक वाहनों से आने के बाद करीब 3 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पैदल तय करनी पड़ती है। भीषण गर्मी और मानसून के दौरान यह यात्रा काफी कष्टकारी हो जाती है।
  • आपातकालीन सुविधा: हेलीपैड बनने से आपात स्थिति में किसी घायल या बीमार व्यक्ति को तुरंत एयरलिफ्ट कर अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा।

निष्कर्ष: सुगम और सुरक्षित यात्रा का लक्ष्य

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहले ही स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार राज्य के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों को आधुनिक कनेक्टिविटी से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। पूर्णागिरि धाम में हेलीपैड का निर्माण इसी विजन का एक हिस्सा है। उम्मीद जताई जा रही है कि निर्माण कार्य जल्द शुरू होगा और अगले बड़े मेले तक श्रद्धालु आसमान से माता के दरबार की भव्यता का आनंद ले सकेंगे।

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