रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की प्रस्तावित भारत यात्रा से पहले द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को नई दिशा देने वाली एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मॉस्को भारत के साथ एक बड़े रक्षा समझौते को अंतिम मंजूरी देने की तैयारी में है। इस समझौते के माध्यम से दोनों देशों के सैन्य रिश्ते न केवल और मजबूत होंगे, बल्कि सामरिक साझेदारी का दायरा भी पहले से कहीं अधिक व्यापक होने की उम्मीद है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और बदलते भू-रणनीतिक समीकरणों के बीच भारत और रूस अपने सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की इच्छा रखते हैं। इस संभावित समझौते के तहत रक्षा उत्पादन साझेदारी, संयुक्त तकनीकी विकास कार्यक्रम और उच्चस्तरीय हथियार प्रणालियों के आदान-प्रदान जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं। दोनों देश पहले से ही कई परियोजनाओं पर साथ काम कर रहे हैं, जिनमें सुखोई लड़ाकू विमान, ब्रह्मोस मिसाइल और एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम प्रमुख हैं।
सूत्रों के मुताबिक, रूस इस बात पर जोर देना चाहता है कि भारत उसके सबसे विश्वसनीय रक्षा साझेदारों में से एक है। यही वजह है कि राष्ट्रपति पुतिन की यात्रा को देखते हुए यह समझौता रणनीतिक स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस वार्ता में रक्षा निर्यात, तकनीकी सहयोग, और भविष्य की संयुक्त सैन्य परियोजनाओं पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है।
भारत भी लंबे समय से रक्षा आधुनिकीकरण पर जोर दे रहा है। ऐसे में रूस के सहयोग से तैयार होने वाला कोई भी नया समझौता न केवल भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमताओं को बढ़ाएगा, बल्कि घरेलू रक्षा उद्योग को भी मजबूती देगा। ‘मेक इन इंडिया’ के तहत संयुक्त उत्पादन मॉडल दोनों देशों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पुतिन की यात्रा से पहले होने वाली यह पहल स्पष्ट संकेत है कि भारत-रूस संबंधों में स्थिरता बनी हुई है, भले ही अंतरराष्ट्रीय राजनीति में निरंतर बदलाव आ रहे हों। आने वाले दिनों में दोनों देशों के उच्च स्तरीय अधिकारियों के बीच और भी बातचीत होने की संभावना है, जिसके बाद इस रक्षा समझौते के औपचारिक रूप से घोषित किए जाने की उम्मीद है।





