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पायलटों की ट्रेनिंग में एक समान सिलेबस की तैयारी, AAIB ने DGCA को दिए सुझाव

नई दिल्ली। देश में पायलट प्रशिक्षण की गुणवत्ता और विमानन सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने सभी फ्लाइंग ट्रेनिंग संगठनों में एक समान प्रशिक्षण पाठ्यक्रम लागू करने का सुझाव दिया है। एजेंसी ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि प्रशिक्षु पायलट अकेले विमान उड़ाने से पहले सभी जरूरी अभ्यास और आपातकालीन प्रक्रियाओं का पर्याप्त प्रशिक्षण पूरा करें।

ये सिफारिशें मध्य प्रदेश के गुना एयरफील्ड पर 6 मार्च 2024 को हुए विमान हादसे की अंतिम जांच रिपोर्ट का हिस्सा हैं। इस हादसे में चाइम्स एविएशन एकेडमी का चार सीटों वाला सेसना 172एस प्रशिक्षण विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। विमान उड़ा रहे प्रशिक्षु पायलट को मामूली चोटें आई थीं।

लैंडिंग के दौरान हुआ था हादसा

AAIB की 29 सितंबर को जारी रिपोर्ट के अनुसार, प्रशिक्षु पायलट विमान को रनवे के भीतर रोकने में सफल नहीं हो पाया। इसके बाद विमान को दोबारा हवा में ले जाने यानी गो-अराउंड की कोशिश की गई, लेकिन विमान रनवे से आगे निकल गया और ढलान पर एक पेड़ से टकरा गया। इससे विमान को नुकसान पहुंचा।

जांच में लैंडिंग के लिए विमान के अस्थिर एप्रोच, गो-अराउंड का फैसला देर से लेने और लैंडिंग से ठीक पहले विमान की स्थिति सुधारने की प्रक्रिया के दौरान एयर ट्रैफिक कंट्रोल से समय पर संपर्क नहीं होने जैसे पहलुओं को हादसे से जुड़ा पाया गया।

आपातकालीन अभ्यास पर जोर

जांच एजेंसी ने सुझाव दिया है कि DGCA सभी फ्लाइंग ट्रेनिंग संगठनों के लिए लाइसेंस की श्रेणी के अनुसार विस्तृत और मानकीकृत पाठ्यक्रम तैयार करने के निर्देश दे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रशिक्षु पायलट अकेले उड़ान भरने से पहले महत्वपूर्ण उड़ान अभ्यास और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की प्रक्रियाओं में पर्याप्त दक्षता हासिल कर लें।

रिपोर्ट में प्रशिक्षण के दौरान सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करने और लैंडिंग के समय सही निर्णय लेने के महत्व पर भी ध्यान दिया गया है। इन सुझावों का उद्देश्य पायलट प्रशिक्षण में एकरूपता लाना और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की आशंका कम करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है।

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