इस्लामाबाद/नई दिल्ली: पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार और कमेंटेटर नजम सेठी ने भारत द्वारा हाल ही में लॉन्च किए गए ‘एआई पावर इंटीग्रेटेड स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को प्रभावित कर सकता है। उनका कहना है कि इस तरह की अत्याधुनिक तकनीक वाले बॉर्डर सुरक्षा प्रोजेक्ट से भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव बढ़ सकता है।
नजम सेठी ने अपने बयान में कहा कि भारत ने इस परियोजना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और हाई-टेक सेंसर सिस्टम को शामिल किया है, जिससे सीमा निगरानी और सुरक्षा में नई क्रांति आएगी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस तकनीकी बढ़त का इस्तेमाल केवल सुरक्षा के लिए होगा या इससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में बदलाव आएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की यह परियोजना स्मार्ट बॉर्डर प्रौद्योगिकी पर आधारित है, जिसमें ड्रोन, सेंसर नेटवर्क और AI आधारित निगरानी उपकरण शामिल हैं। इसके जरिए सीमा पर किसी भी अनधिकृत गतिविधि का तुरंत पता लगाया जा सकेगा और खतरे का मुकाबला तेज़ी से किया जा सकेगा।
नजम सेठी ने साथ ही यह भी कहा कि पाकिस्तान इस परियोजना की संभावित रणनीतिक और सुरक्षा चुनौतियों को गंभीरता से देख रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सीमा सुरक्षा को लेकर दोनों देशों को विवेकपूर्ण और संवाद आधारित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
इस प्रोजेक्ट के तहत भारत सरकार ने सीमाई इलाकों में उच्च तकनीक वाले निगरानी उपकरणों की तैनाती के लिए भारी निवेश किया है। परियोजना का लक्ष्य सीमा सुरक्षा को मजबूत करना और घुसपैठ, तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण रखना है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम भारत की सैन्य और तकनीकी क्षमता को बढ़ावा देगा, लेकिन इसके साथ ही क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा प्रतिस्पर्धा भी बढ़ सकती है। पाकिस्तान की प्रतिक्रिया इस बात का संकेत है कि टेक्नोलॉजी आधारित सुरक्षा उपायों को हमेशा राजनीतिक और कूटनीतिक संदर्भ में भी देखा जाता है।
हालांकि, भारत ने स्पष्ट किया है कि यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से सुरक्षा और निगरानी उद्देश्य के लिए है, और इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार की आक्रामकता या तनाव बढ़ाना नहीं है।
इस तरह, ‘एआई पावर इंटीग्रेटेड स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट’ ने न केवल तकनीकी क्षेत्र में नया अध्याय खोला है, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा चर्चा और रणनीतिक संतुलन पर भी ध्यान खींचा है।





