Thursday, March 5, 2026

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पाकिस्तान में गूंजा ‘जय श्री राम’: लाहौर के ऐतिहासिक लौह मंदिर का जीर्णोद्धार पूरा; भगवान राम के पुत्र ‘लव’ से जुड़ा है मंदिर का इतिहास

लाहौर (पाकिस्तान): पाकिस्तान के लाहौर में हिंदू विरासत और आस्था के प्रतीक लौह मंदिर (Lauhu Temple) के जीर्णोद्धार का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। वर्षों की उपेक्षा और जर्जर स्थिति के बाद, अब इस प्राचीन मंदिर के द्वार स्थानीय हिंदुओं और दर्शनार्थियों के लिए आधिकारिक तौर पर खोल दिए गए हैं। लाहौर किले के भीतर स्थित यह मंदिर न केवल वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है, बल्कि इसका सीधा संबंध भगवान श्री राम के परिवार से है, जो इसे दुनिया भर के हिंदुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है।

भगवान राम के पुत्र ‘लव’ से है गहरा नाता

धार्मिक मान्यताओं और ऐतिहासिक ग्रंथों के अनुसार, लाहौर शहर की स्थापना भगवान श्री राम के ज्येष्ठ पुत्र ‘लव’ ने की थी।

  • शहर का नाम: प्राचीन काल में इस शहर को ‘लवपुर’ कहा जाता था, जो कालक्रम में बदलकर लाहौर हो गया।
  • समर्पित मंदिर: यह मंदिर उन्हीं राजकुमार लव (जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘लौह’ भी कहा जाता है) को समर्पित है। लाहौर किले के ‘आलमगीरी गेट’ के पास स्थित यह मंदिर लव के जन्म और उनके शासनकाल की स्मृतियों को जीवंत करता है।

जीर्णोद्धार: खंडहर से भव्यता तक का सफर

लंबे समय से यह मंदिर उपेक्षा का शिकार था और इसके अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा था।

  1. सरकार और बोर्ड की पहल: ‘इवेक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड’ (ETPB) और पाकिस्तान हिंदू परिषद के प्रयासों से पिछले कुछ महीनों में मंदिर की मरम्मत का कार्य युद्ध स्तर पर किया गया।
  2. मूल स्वरूप का संरक्षण: जीर्णोद्धार के दौरान मंदिर की प्राचीन नक्काशी और दीवारों के मूल स्वरूप को बनाए रखने का विशेष ध्यान रखा गया है। परिसर की सफाई के साथ-साथ वहां आधुनिक लाइटिंग और सुरक्षा के इंतजाम भी किए गए हैं।

भक्तों में खुशी की लहर

मंदिर के खुलने से पाकिस्तान के अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय में भारी उत्साह है।

  • विशेष पूजा-अर्चना: उद्घाटन के अवसर पर स्थानीय पंडितों द्वारा विशेष हवन और शांति पाठ किया गया।
  • धार्मिक पर्यटन की उम्मीद: स्थानीय अधिकारियों का मानना है कि इस मंदिर के पुनरुद्धार से भारत और अन्य देशों से आने वाले हिंदू तीर्थयात्रियों की संख्या में इजाफा होगा, जिससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण

पाकिस्तान सरकार के इस कदम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण दोनों देशों के बीच साझा विरासत को जोड़ने का काम करता है।

  • किले की शोभा: लाहौर किले को यूनेस्को (UNESCO) की विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया है, और इस मंदिर का नवीनीकरण किले की सांस्कृतिक विविधता को और अधिक समृद्ध बनाता है।

सुरक्षा के कड़े प्रबंध

मंदिर की संवेदनशीलता को देखते हुए लाहौर पुलिस ने परिसर के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। दर्शनार्थियों के लिए प्रवेश प्रक्रिया को सुगम बनाया गया है ताकि वे बिना किसी बाधा के अपनी आस्था व्यक्त कर सकें।

“लौह मंदिर केवल एक संरचना नहीं, बल्कि लाहौर की आत्मा और भगवान राम के वंशजों की निशानी है। इसका पुनरुद्धार शांति और सांप्रदायिक सौहार्द का एक सकारात्मक संदेश है।” — प्रतिनिधि, पाकिस्तान हिंदू परिषद

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