Thursday, March 5, 2026

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पांच दशक का सियासी सफर: चारों सदनों के सदस्य बनने वाले बिरले नेता बनेंगे नीतीश; जानें विधानसभा से राज्यसभा तक की पूरी कहानी

पटना: बिहार की राजनीति में ‘चाणक्य’ कहे जाने वाले नीतीश कुमार एक बार फिर इतिहास रचने की दहलीज पर हैं। मुख्यमंत्री के पद से हटकर राज्यसभा जाने की अटकलों के बीच नीतीश कुमार के नाम एक ऐसा दुर्लभ रिकॉर्ड दर्ज होने जा रहा है, जो भारतीय राजनीति में बहुत कम नेताओं के पास है। यदि वे उच्च सदन पहुँचते हैं, तो वे विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा—यानी भारतीय लोकतंत्र के चारों सदनों की सदस्यता लेने वाले बिहार के गिने-चुने राजनेताओं में शामिल हो जाएंगे। 1970 के दशक के जेपी आंदोलन से उभरे नीतीश कुमार का पांच दशकों का यह सफर संघर्ष, सत्ता और रणनीतिक कौशल की एक जीवंत दास्तां है।

  1. विधानसभा: संघर्षपूर्ण शुरुआत और पहली जीत

नीतीश कुमार के संसदीय सफर की शुरुआत बिहार विधानसभा से हुई थी, लेकिन यह राह आसान नहीं थी:

  • शुरुआती हार: नीतीश कुमार ने 1977 और 1980 में हरनौत विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
  • पहली जीत: 1985 में उन्होंने पहली बार हरनौत से विधानसभा चुनाव जीता और सदन में कदम रखा। यह वह समय था जब उन्होंने अपनी प्रशासनिक क्षमता और विकासवादी सोच की झलक दिखानी शुरू की थी।
  1. लोकसभा: केंद्र की राजनीति में बढ़ा कद

1980 के दशक के अंत में नीतीश कुमार ने राज्य की राजनीति से केंद्र की ओर रुख किया:

  • सांसद के रूप में सफर: 1989 में वे पहली बार बाढ़ (Barh) निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। इसके बाद उन्होंने 1991, 1996, 1998 और 1999 में लगातार लोकसभा चुनाव जीतकर दिल्ली की राजनीति में अपनी जड़ें मजबूत कीं।
  • केंद्रीय मंत्री: अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में उन्होंने रेल मंत्री और कृषि मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों को संभाला, जहाँ ‘रेलवे का कायाकल्प’ करने के लिए उनकी आज भी सराहना की जाती है।
  1. विधान परिषद: मुख्यमंत्री बनने की अनिवार्य शर्त

2005 में जब नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने सीधे चुनाव लड़ने के बजाय उच्च सदन का रास्ता चुना:

  • लगातार सदस्यता: 2006 से लेकर अब तक नीतीश कुमार बिहार विधान परिषद (MLC) के सदस्य रहे हैं। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने इसी सदन की सदस्यता को प्राथमिकता दी, ताकि वे पूरे राज्य में विकास कार्यों और चुनाव प्रचार पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
  1. राज्यसभा: पांचवें दशक में चौथा सदन

अब 2026 में, नीतीश कुमार अपने करियर के उस मोड़ पर हैं जहाँ वे ‘चौथे सदन’ की सदस्यता ग्रहण करने जा रहे हैं:

  • ऐतिहासिक रिकॉर्ड: राज्यसभा पहुँचते ही वे उन विशिष्ट नेताओं की सूची में शामिल हो जाएंगे जिन्होंने राज्य और केंद्र दोनों के उच्च और निम्न सदनों का प्रतिनिधित्व किया है।
  • नई भूमिका: माना जा रहा है कि अनुभव के इस लंबे पड़ाव के बाद नीतीश कुमार अब राष्ट्रीय राजनीति में एक मार्गदर्शक या केंद्र में किसी बड़ी संवैधानिक भूमिका में नजर आ सकते हैं।

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