Thursday, March 5, 2026

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पहाड़ों में फिर लौटेगी ठंड: उत्तराखंड में बर्फबारी का इंतजार खत्म; IMD ने जारी किया येलो अलर्ट

देहरादून: उत्तराखंड के पर्यटन स्थलों और ऊँचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की उम्मीद लगाए बैठे लोगों के लिए बड़ी खबर है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य में मौसम के बदलते तेवरों को देखते हुए अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, एक सक्रिय ‘पश्चिमी विक्षोभ’ (Western Disturbance) हिमालयी क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है, जिसके प्रभाव से अगले 48 से 72 घंटों के भीतर राज्य के उच्च हिमालयी जनपदों में भारी बर्फबारी और निचले इलाकों में बारिश की प्रबल संभावना है। इस बदलाव के साथ ही प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से चढ़ रहा पारा एकाएक गिरेगा और कड़ाके की ठंड की वापसी होगी। प्रशासन ने भी पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को सावधानी बरतने के निर्देश जारी किए हैं।

इन जिलों में बर्फबारी की प्रबल संभावना

मौसम विभाग ने विशेष रूप से पांच जिलों के लिए चेतावनी जारी की है:

  • उत्तरकाशी और चमोली: केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के साथ-साथ हेमकुंड साहिब के इलाकों में भारी बर्फबारी की उम्मीद है।
  • रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़: मुनस्यारी और धारचूला की चोटियों पर सफेद चादर बिछने के आसार हैं।
  • पर्यटन स्थल: औली, हर्षिल और चकराता जैसे प्रमुख पर्यटन केंद्रों में भी बर्फबारी होने की संभावना है, जिससे पर्यटन व्यवसायियों के चेहरे खिल गए हैं।

मैदानी इलाकों में बारिश और कोहरे की चेतावनी

पहाड़ों में बर्फबारी का सीधा असर मैदानी क्षेत्रों पर पड़ेगा:

  1. तापमान में गिरावट: देहरादून, हरिद्वार, रुड़की और ऊधमसिंह नगर में गरज के साथ हल्की बौछारें पड़ सकती हैं, जिससे अधिकतम तापमान में 5 से 7 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आएगी।
  2. शीतलहर का अलर्ट: बारिश के बाद चलने वाली बर्फीली हवाओं के कारण मैदानी इलाकों में ‘कोल्ड डे’ (Cold Day) की स्थिति बन सकती है।
  3. घना कोहरा: सुबह और रात के समय मैदानी इलाकों में विजिबिलिटी (Visibility) कम रहने की संभावना है, जिससे यातायात प्रभावित हो सकता है।

किसानों और बागवानों के लिए राहत की खबर

लंबे समय से चल रहे शुष्क मौसम (Dry Spell) के बीच यह बारिश और बर्फबारी किसी वरदान से कम नहीं है:

  • सेब की खेती: सेब के बागवानों के लिए चिलिंग ऑवर (Chilling Hours) का पूरा होना जरूरी है, जो केवल बर्फबारी से ही संभव है।
  • रबी की फसल: गेहूं और सरसों जैसी फसलों के लिए इस समय की बारिश ‘अमृत’ के समान मानी जा रही है, क्योंकि नमी की कमी से फसलें सूखने लगी थीं।

निष्कर्ष: प्रशासन ने कसी कमर

मौसम विभाग की चेतावनी के बाद जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन इकाइयों को सक्रिय कर दिया है। सीमांत क्षेत्रों में बर्फ हटाने वाली मशीनों (Snow Cutters) को तैनात किया गया है ताकि मार्ग बाधित न हों। चारधाम यात्रा मार्गों पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है। पर्यटकों को सलाह दी गई है कि वे ऊँचाई वाले क्षेत्रों में जाने से पहले मौसम के ताजा अपडेट जरूर लें।

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