कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पूर्व बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल किया है। इस कड़ी में कुल 64 अधिकारियों के तबादले एवं पद परिवर्तन किये गए हैं, जिसमें 17 जिलों के प्रमुख आईएएस / जिला मजिस्ट्रेट (DMs) शामिल हैं।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह कदम Election Commission of India की तरफ से जल्द ही घोषित होने की संभावना वाले Special Intensive Revision (SIR) के पहले उठाया गया है। उसी चलते राज्य सरकार ने अपनी ओर से तैयारियों में तेजी लाई है।
प्रमुख बिंदु
- इस फेरबदल में 17 जिलों के डीएम शामिल हैं, जिनका स्थानांतरण अलग-अलग विभागों या अन्य जिलों में कर दिया गया है। उदाहरण के लिए, Sharad Kumar Dwivedi (पूर्व DM North 24 Parganas) को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है।
- इसी तरह, Sumit Gupta (पूर्व DM South 24 Parganas) को कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन का आयुक्त बनाया गया है।
- फेरबदल का कदम समय-संगत माना जा रहा है क्योंकि SIR प्रक्रिया शुरू होने के बाद डीएम्स को बदलना चुनावी संवेदनशील माना जाता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा,
“इससे पहले कि ECI उन डीएम्स पर कार्रवाई करे जिन्होंने तीन साल से अधिक उसी पद पर हैं, राज्य सरकार ने पहले ही उन्हें स्थानांतरित कर दिया।”
- प्रशासन ने इसे “रूटीन” परिवर्तन बताया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे चुनावी तैयारी का हिस्सा कह रहे हैं।
विश्लेषण और प्रभाव
इस बृहद स्थानांतरण से निम्नलिखित बातें सामने आती हैं:
- चुनाव से पहले प्रशासनिक ढांचे को चुस्त-दुरुस्त करना सरकार के लिए अहम माना जा रहा है।
- नया डीएम और अधिकारी वर्ग बनाया जाना यह संकेत देता है कि राज्य सरकार स्थानीय प्रशासन को मजबूत कराना चाहती है तथा नियंत्रण-सक्षम बनाना चाहती है।
- हालांकि अधिकारियों का कहना है कि यह केवल स्थानांतरण है, लेकिन चुनावी माहौल में इसे “प्रभाव क्षेत्र पुनर्संगठन” भी कहा जा रहा है।
- स्थानांतरण की सूची सार्वजनिक नहीं पूरी तरह से सामने आई है, जिससे यह अंदेशा है कि और बदलाव भी हो सकते हैं।
आगे क्या होगा
- अब नए डीएम्स को अपने जिले/पद की जिम्मेदारी सौंपा जाएगा और शीघ्र ही उन्हें पद-भार ग्रहण करना होगा।
- SIR की प्रक्रिया के दौरान यह देखा जाना है कि प्रशासनिक बदलावों का निर्वाचन प्रक्रिया पर कितना प्रभाव पड़ता है।
- राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए प्रशासनिक-तैयारी, निरीक्षण और नियंत्रण व्यवस्था की भूमिका अहम होगी।





