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पश्चिम एशिया संघर्ष: विदेश मंत्री जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से की फोन पर विस्तार से बात; ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पर हुई चर्चा

नई दिल्ली (24 मार्च, 2026):पश्चिम एशिया में जारी भीषण और विनाशकारी संघर्ष, जिसमें ईरान, इजराइल, अमेरिका और खाड़ी देश शामिल हैं, अब अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है। इस युद्ध का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, आपूर्ति श्रृंखलाओं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ रहा है, जिससे भारत की आर्थिक सुरक्षा और मुद्रास्फीति दर पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार (24 मार्च) को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो (Marco Rubio) से फोन पर विस्तार से बात की। विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट कर बताया कि इस बातचीत का मुख्य विषय पश्चिम एशिया का संघर्ष और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर उसका प्रभाव था। यह वार्ता भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक सतर्कता का एक बड़ा और सकारात्मक प्रतीक है, जिससे देश भर में विश्वास और स्थिरता का माहौल व्याप्त हो गया है।

प्रमुख वार्ता: पश्चिम एशिया संकट और ऊर्जा सुरक्षा पर जोर

विदेश मंत्री जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बीच हुई फोन वार्ता में पश्चिम एशिया संकट और ऊर्जा सुरक्षा पर गहन चर्चा हुई:

  • पश्चिम एशिया संघर्ष: दोनों विदेश मंत्रियों ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की गंभीरता और इसके वैश्विक सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों पर चिंता व्यक्त की। जयशंकर ने रूबियो को भारत की चिंताओं से अवगत कराया, विशेष रूप से ऊर्जा आपूर्ति और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर युद्ध के प्रभाव को लेकर।
  • ऊर्जा सुरक्षा: दोनों विदेश मंत्रियों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सहयोग करने की प्रतिबद्धता जताई। रूबियो ने जयशंकर को आश्वस्त किया कि अमेरिका भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में हर संभव मदद करेगा।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव: कूटनीतिक और आर्थिक पहलों पर चर्चा

विदेश मंत्री जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने पश्चिम एशिया संकट के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों पर भी चर्चा की:

“विदेश मंत्री जयशंकर ने रूबियो से कहा कि पश्चिम एशिया संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है, जिसे हल करने के लिए कूटनीतिक और आर्थिक पहलों का उपयोग किया जाना चाहिए। दोनों विदेश मंत्रियों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाए रखने और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए सहयोग करने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एकजुट होकर इस संकट को हल करने के लिए काम करने की अपील की।”

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