रोम/वाशिंगटन: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भीषण सैन्य संघर्ष और तनाव के बीच, अमेरिका को अपने यूरोपीय सहयोगियों से एक के बाद एक बड़े झटके लग रहे हैं। स्पेन और फ्रांस के बाद, अब इटली ने भी ईरान के खिलाफ जारी अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों के लिए अपने सैन्य अड्डों (Military Bases) के उपयोग की अनुमति देने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया है। इटली सरकार का यह कड़ा और अप्रत्याशित निर्णय अमेरिका के लिए एक बड़ा रणनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि इटली भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) में एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण और रणनीतिक स्थान रखता है। इतालवी रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वे पश्चिम एशिया में जारी किसी भी युद्ध या सैन्य संघर्ष का हिस्सा नहीं बनना चाहते हैं और अपनी संप्रभुता व राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेंगे।
सिसिली स्थित सिगोनेला एयर बेस पर अमेरिकी बमवर्षकों को उतरने की अनुमति नहीं: रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेट्टो का कड़ा फैसला
इतालवी रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेट्टो (Guido Crosetto) ने यह कड़ा और साहसिक निर्णय तब लिया जब उन्हें जानकारी मिली कि कुछ अमेरिकी लंबी दूरी के बमवर्षक विमान (American Bombers) पश्चिम एशिया की ओर जाते समय सिसिली स्थित ‘सिगोनेला नौसेना एयर बेस’ (Sigonella Naval Air Base) पर उतरना चाहते थे। इतालवी समाचारपत्र ‘ला रिपब्लिका’ (La Repubblica) के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने इस उपयोग के लिए न तो कोई औपचारिक अनुमति मांगी और न ही इतालवी सैन्य अधिकारियों से पूर्व परामर्श किया, जो राजनयिक और सैन्य प्रोटोकॉल का एक गंभीर उल्लंघन है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि संबंधित सूचना तब जारी हुई जब अमेरिकी विमान पहले ही मार्ग में थे, जिससे इटली सरकार को त्वरित और कड़ा निर्णय लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।
इटली-अमेरिका सैन्य समझौते का उल्लंघन: लाजिस्टिकल उड़ानें नहीं थीं
इतालवी रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में स्पष्ट किया कि प्रारंभिक जाँच और विश्लेषण में यह स्पष्ट हो गया है कि ये अमेरिकी उड़ानें सामान्य या केवल लाजिस्टिकल (Logistical) प्रकृति की नहीं थीं। इसके विपरीत, ये उड़ानें सीधे तौर पर पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष और ईरान के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाइयों से संबंधित थीं। इसलिए, रक्षा मंत्री क्रोसेट्टो ने निष्कर्ष निकाला कि ये उड़ानें इटली-अमेरिका सैन्य समझौते (NATO Agreement) के दायरे में नहीं आतीं और इटली अपनी धरती का उपयोग किसी भी आक्रामक सैन्य कार्रवाई के लिए करने की अनुमति नहीं दे सकता। इटली सरकार के इस कड़े रुख ने अमेरिका और नाटो (NATO) सहयोगियों के बीच दरार और अविश्वास को और अधिक गहरा कर दिया है।
“हम युद्ध में नहीं हैं और न ही शामिल होना चाहते हैं”: प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का दोटूक इनकार
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी (Giorgia Meloni) ने भी इस मुद्दे पर अपनी सरकार के कड़े और स्पष्ट रुख को दोहराया है। उन्होंने ‘आरटीएल रेडियो’ (RTL Radio) को दिए एक विशेष साक्षात्कार में दोटूक शब्दों में कहा, “हम युद्ध में नहीं हैं और न ही इसमें शामिल होना चाहते हैं।” मेलोनी ने स्पष्ट किया कि इटली पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता बहाली के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी ऐसी कार्रवाई का समर्थन नहीं करेगा जो क्षेत्र में तनाव और हिंसा को और अधिक बढ़ाए। उन्होंने कहा कि इटली अपने राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता की रक्षा करेगा और किसी भी बाहरी दबाव में आकर कोई ऐसा निर्णय नहीं लेगा जो देश के लिए हानिकारक हो। मेलोनी का यह बयान इटली की विदेश नीति में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है और यह अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।





