नई दिल्ली (23 मार्च, 2026): पश्चिम एशिया में जारी भीषण और विनाशकारी संघर्ष, जिसमें ईरान, इजराइल, अमेरिका और खाड़ी देश शामिल हैं, अब अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है। इस युद्ध का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, आपूर्ति श्रृंखलाओं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ रहा है, जिससे भारत की आर्थिक सुरक्षा और मुद्रास्फीति दर पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (23 मार्च) को लोकसभा में एक ऐतिहासिक और विस्तृत संबोधन दिया। प्रधानमंत्री ने देश को आश्वस्त किया कि भारत सरकार इस संकट से निपटने के लिए कूटनीतिक, आर्थिक, और सैन्य स्तर पर पूरी तरह तैयार है। उन्होंने संसद में खुलासा किया कि भारत ने ऊर्जा आयात के अपने स्रोतों को 27 से बढ़ाकर 41 कर दिया है और युद्ध क्षेत्र से अब तक 3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाया जा चुका है। यह संबोधन भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, और कूटनीतिक कौशल का एक बड़ा और सकारात्मक प्रतीक है, जिससे देश भर में विश्वास और स्थिरता का माहौल व्याप्त हो गया है।
संबोधन का मुख्य एजेंडा: अप्रत्याशित चुनौतियां और भारत की नीति
प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में अपने संबोधन की शुरुआत पश्चिम एशिया संकट की गंभीरता और इसके भारत पर पड़ने वाले प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए की:
- अप्रत्याशित चुनौतियां: प्रधानमंत्री ने कहा कि इस युद्ध ने भारत के सामने आर्थिक, राष्ट्रीय सुरक्षा, और मानवीय जैसी अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया इस संकट के जल्द से जल्द समाधान के लिए सभी पक्षों से आग्रह कर रही है, क्योंकि इसका विश्व अर्थव्यवस्था पर विपरीत असर हो रहा है।
- स्पष्ट डिप्लोमेसी: प्रधानमंत्री ने भारत की कूटनीतिक नीति को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत ने शुरुआत से ही इस युद्ध पर चिंता व्यक्त की है और बातचीत व कूटनीति को ही इस समस्या का समाधान माना है। उन्होंने पश्चिम एशिया के सभी राष्ट्राध्यक्षों से बात की है और ऊर्जा व नागरिक इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमले का विरोध किया है।
भारतीयों की सुरक्षा: सर्वोच्च प्राथमिकता और 3.75 लाख की वापसी
प्रधानमंत्री मोदी ने खाड़ी देशों में रहने वाले लगभग एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया:
- सुरक्षित वापसी: प्रधानमंत्री ने संसद में जानकारी दी कि युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीय सुरक्षित स्वदेश लौट चुके हैं। ईरान से 1000 भारतीय सुरक्षित लौटे हैं, जिनमें 700 से अधिक मेडिकल छात्र हैं।
- सुरक्षा का आश्वासन: प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने पश्चिम एशिया के ज्यादातर राष्ट्राध्यक्षों से दो राउंड फोन पर बात की है और सभी ने भारतीयों की सुरक्षा का आश्वासन दिया है। प्रभावित देशों में भारतीयों को जरूरी मदद दी जा रही है और 24 घंटे आपात कंट्रोल रूम व हेल्पलाइन जारी की गई हैं।
- शिक्षा और स्वास्थ्य: खाड़ी में पढ़ने वाले भारतीय विद्यार्थियों की निर्बाध पढ़ाई जारी रखने के लिए सीबीएसई (CBSE) तत्काल कदम उठा रही है। युद्ध में मारे गए और घायल हुए लोगों के परिवारों को जरूरी मदद दी जा रही है।
ऊर्जा सुरक्षा: 41 देशों से आयात और स्ट्रैटिजिक रिजर्व
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति पर एक महत्वपूर्ण खुलासा किया:
“हमारी सरकार ने तेल और गैस आयात के अपने स्रोतों को 27 से बढ़ाकर 41 कर दिया है। यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जिससे आपूर्ति में विविधता आई है और जोखिम कम हुआ है। आज भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन का स्ट्रैटिजिक रिजर्व है और 65 लाख मीट्रिक टन के रिजर्व पर काम किया जा रहा है। हमने अपनी रिफाइनरिंग क्षमता भी बढ़ाई है, ताकि पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति निर्बाध बनी रहे।”
- होर्मुज संकट और एलपीजी: प्रधानमंत्री ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों का आना-जाना मुश्किल हुआ है, जिससे एलपीजी (LPG) और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर खतरा मंडरा रहा है। भारत अपनी जरूरत की 60 फीसदी एलपीजी आयात करता है, इसलिए सरकार ने इसके घरेलू उत्पादन को प्राथमिकता दी है और इसके देश में उत्पादन को बढ़ाया जा रहा है।
कृषि और किसानों की चिंता: खाद की पर्याप्त व्यवस्था और यूरिया प्लांट
प्रधानमंत्री मोदी ने युद्ध का भारतीय कृषि पर पड़ने वाले प्रभावों पर भी चिंता व्यक्त की और किसानों को आश्वस्त किया:
- पर्याप्त खाद्यान्न: प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के किसानों ने हमारे भंडार भर रखे हैं और हमारे पास पर्याप्त खाद्यान्न हैं।
- खाद की व्यवस्था: सरकार ने खाद की पर्याप्त व्यवस्था भी की है। बीते वर्षों में भारत में छह यूरिया प्लांट शुरू किए गए हैं। इसी तरह डीएनपी और घरेलू यूरिया का उत्पादन बढ़ाया गया है। प्रधानमंत्री ने किसानों को नैनो यूरिया का विकल्प भी दिया है और जैविक खेती के लिए भी प्रोत्साहित कर रहे हैं।
वैकल्पिक ईंधन और भविष्य: इथेनॉल मिक्सिंग और रेलवे का विद्युतीकऱण
प्रधानमंत्री मोदी नेAlternative ईंधन (वैकल्पिक ईंधन) पर काम करने के महत्व को रेखांकित किया:
- इथेनॉल मिक्सिंग: बीते 10-11 साल में पेट्रोल में 20 फीसदी तक इथेनॉल की मिक्सिंग को बढ़ाया गया है।
- रेलवे का विद्युतीकऱण: रेलवे के विद्युतीकऱण से भारत को 180 करोड़ लीटर तेल अतिरिक्त लगने से बचत हुई है।
- सुरक्षित भविष्य: प्रधानमंत्री ने कहा कि आज जिस स्केल पर वैकल्पिक ईंधन पर काम हो रहा है, उससे भारत का भविष्य और सुरक्षित होगा।





