नई दिल्ली (27 मार्च, 2026): पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में ईरान और इस्राइल के बीच जारी भीषण युद्ध और बढ़ते तनाव के बीच, भारत सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने पश्चिम एशिया विवाद से पैदा होने वाले बहुआयामी मामलों और भारत पर इसके संभावित प्रभावों पर निरंतर और पैनी नज़र रखने के लिए एक उच्च स्तरीय ‘इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप’ (Inter-Ministerial Group – IMG) यानी अंतर-मंत्रालयी समूह का गठन किया है। इस अत्यंत महत्वपूर्ण समिति की अध्यक्षता केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) कर रहे हैं। समिति में देश के गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah), वित्त मंत्री निर्म निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) के साथ-साथ अन्य संबंधित मंत्रालयों के वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी भी सदस्य के रूप में शामिल हैं। यह समिति पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों की पल-पल की समीक्षा करेगी और भारत की सुरक्षा, कूटनीति और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले किसी भी असर से निपटने के लिए आवश्यक रणनीतियां तैयार करेगी।
हाई-लेवल समिति का गठन: सुरक्षा, कूटनीति और अर्थव्यवस्था पर फोकस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर गठित यह ‘इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप’ पश्चिम एशिया संकट के भारत पर पड़ने वाले प्रभावों का व्यापक मूल्यांकन करेगा:
- रणनीतिक समीक्षा: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में यह समिति ईरान-इस्राइल युद्ध के सैन्य और रणनीतिक पहलुओं की समीक्षा करेगी। यह समिति भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) पर पड़ने वाले किसी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष खतरे का आकलन करेगी और भारतीय सेना को सतर्क रहने के निर्देश देगी।
- कूटनीतिक समन्वय: समिति विदेश मंत्रालय (MEA) के साथ मिलकर कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से पश्चिम एशिया में शांति बहाली के प्रयासों में भारत की भूमिका पर चर्चा करेगी। यह समिति विदेशों में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें सुरक्षित वापस लाने (Evacuation) की योजनाओं का भी समन्वय करेगी।
- आर्थिक प्रभाव का आकलन: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के शामिल होने से, यह समिति पश्चिम एशिया संकट के भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy), विशेष रूप से कच्चे तेल (Crude Oil) की आपूर्ति और कीमतों पर पड़ने वाले असर का विस्तृत मूल्यांकन करेगी। यह समिति तेल आयात के वैकल्पिक स्रोतों (Alternative Sources) और देश की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएगी।
पश्चिम एशिया संकट: भारत के लिए चुनौतियां और तैयारियां
ईरान-इस्राइल युद्ध भारत के लिए कई गंभीर चुनौतियां पैदा कर रहा है, जिससे निपटने के लिए यह समिति तैयार की गई है:
- ऊर्जा सुरक्षा: भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है। युद्ध के कारण तेल आपूर्ति बाधित होने और कीमतों में उछाल की आशंका को देखते हुए, यह समिति तेल के भंडारण (Storage) और वितरण (Distribution) की योजनाओं पर चर्चा करेगी।
- भारतीय समुदाय की सुरक्षा: पश्चिम एशिया के विभिन्न देशों में लाखों भारतीय नागरिक काम करते हैं। समिति उनके परिवारों के साथ समन्वय स्थापित करने और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें सुरक्षित वापस लाने की तैयारियों की समीक्षा करेगी।
- व्यापार और निवेश: पश्चिम एशिया भारत का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक भागीदार है। युद्ध के कारण भारत के निर्यात (Export) और निवेश (Investment) पर असर पड़ सकता है, जिसे कम करने के लिए समिति रणनीतियां तैयार करेगी।





