नैनीताल: सरोवर नगरी नैनीताल और इसके आसपास के इलाकों में रविवार रात प्रकृति का भीषण प्रकोप देखने को मिला। तेज आंधी-तूफान के साथ हुई भारी ओलावृष्टि ने पूरे क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण शहर की बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। बिजली की लाइनें और पोल क्षतिग्रस्त होने से शहर पिछले 20 घंटों से अधिक समय से अंधेरे में डूबा हुआ है, जिससे स्थानीय निवासियों के साथ-साथ पर्यटकों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
आंधी और ओलों ने मचाई तबाही: भवनों को भारी नुकसान
रविवार रात अचानक आए मौसम के बदलाव ने पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया:
- क्षतिग्रस्त हुए भवन: आंधी की गति इतनी तेज थी कि शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के कई घरों की छतें उड़ गईं। कई स्थानों पर भवनों के ऊपर पेड़ गिरने से दीवारों में दरारें आ गईं और संपत्ति का काफी नुकसान हुआ है।
- सड़कों पर गिरे पेड़: शहर के मुख्य मार्गों और आंतरिक सड़कों पर दर्जनों पेड़ जड़ से उखड़कर गिर गए, जिससे आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई।
बिजली और पानी का संकट: 20 घंटे से ठप रही आपूर्ति
आंधी-तूफान का सबसे ज्यादा असर बिजली और पानी की व्यवस्था पर पड़ा है:
- धराशायी हुए पोल: विद्युत विभाग के अनुसार, लाइनों पर पेड़ गिरने के कारण कई बिजली के पोल टूट गए हैं। शहर में लगभग 20 घंटे से बिजली गुल है, जिसके कारण मोबाइल चार्जिंग से लेकर दैनिक कार्यों तक के लिए लोग परेशान रहे।
- ठप रही पानी की सप्लाई: बिजली नहीं होने के कारण जल संस्थान के पंपिंग स्टेशन भी बंद रहे। इससे शहर के कई वार्डों में पानी की आपूर्ति नहीं हो सकी, जिससे लोगों के सामने पेयजल का संकट खड़ा हो गया है।
यातायात प्रभावित: हल्द्वानी मार्ग पर 5 घंटे लगा रहा जाम
तूफान का असर नैनीताल की लाइफलाइन माने जाने वाले हल्द्वानी मार्ग पर भी दिखा:
- रास्ता रहा बंद: हल्द्वानी रोड पर एक विशालकाय पेड़ गिरने के चलते बड़े वाहनों की आवाजाही लगभग पांच घंटे तक पूरी तरह बाधित रही।
- वाहनों की लंबी कतार: मार्ग बंद होने की वजह से सड़क के दोनों ओर बसों और ट्रकों की लंबी कतारें लग गईं। प्रशासन ने स्थानीय लोगों की मदद से क्रेन बुलाकर पेड़ को हटाया, जिसके बाद यातायात धीरे-धीरे सुचारू हो सका।
प्रशासनिक मुस्तैदी और बहाली के प्रयास
नगर पालिका और प्रशासन की टीमें सुबह से ही सड़कों पर गिरे पेड़ों को हटाने और रास्तों को साफ करने में जुटी हुई हैं। विद्युत विभाग के कर्मचारियों द्वारा युद्धस्तर पर क्षतिग्रस्त पोलों को बदलने और लाइनों को जोड़ने का काम किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति को पूरी तरह सामान्य होने में थोड़ा और समय लग सकता है।





