उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में हाल ही में आयोजित बर्ड वॉचिंग अभियान में पक्षी प्रेमियों को समृद्ध जैव विविधता की अनोखी झलक देखने को मिली। राज्यभर से जुड़े 144 बर्ड वॉचर ने अलग-अलग इलाकों में कुल 344 पक्षी देखने का रिकॉर्ड दर्ज किया। इनमें सबसे अधिक प्रजातियां नैनीताल जिले में दिखाई दीं, जिसने अभियान का मुख्य आकर्षण बनने का गौरव हासिल किया।
वन विभाग व प्रकृति संरक्षण से जुड़ी संस्थाओं के सहयोग से चलाए गए इस अभियान में पर्वतीय और तराई क्षेत्रों के कई स्थलों को शामिल किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार उत्तराखंड की विविध जलवायु और प्राकृतिक आवास कई दुर्लभ पक्षियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करते हैं। बर्ड वॉचिंग टीमों ने जंगलों, जलाशयों, वन पंचायत क्षेत्रों और ऊंचाई वाले ट्रेक मार्गों पर घंटों रुककर अवलोकन किया। इस दौरान प्रवासी और स्थानीय दोनों तरह की प्रजातियाँ बड़ी संख्या में देखी गईं।
अभियान में शामिल प्रमुख स्थलों में नैनीताल, रामनगर, देहरादून, पौड़ी, ऊधमसिंह नगर और टिहरी जैसे क्षेत्र शामिल थे। इनमें नैनीताल जिले ने सबसे अधिक पक्षी प्रजातियों का रिकॉर्ड बनाया, जहाँ प्रतिभागियों को सुबह से लेकर शाम तक कई रंग-बिरंगे और दुर्लभ पक्षी दिखाई दिए। नैनीताल का अनुकूल मौसम, घने जंगल और झीलों का वातावरण पक्षियों की विविधता के लिए जाना जाता है।
बर्ड वॉचर टीमों ने यहां ब्लैक बुलबुल, ग्रे-हेडेड वॉर्बलर, हिमालयन वल्चर, स्पॉटेड डव, हिल माइनाह सहित कई दुर्लभ प्रजातियों को सूचीबद्ध किया।
सर्दियों की शुरुआत के साथ ही कई देशों और हिमालय के ऊपरी क्षेत्रों से प्रवासी पक्षियों का आगमन राज्य में बढ़ रहा है। विशेषज्ञों ने बताया कि यह मौसम प्रवासी पक्षियों के अवलोकन के लिए बिल्कुल उपयुक्त है। विशेष रूप से तराई और जंगलों से सटे जल स्रोतों के पास कई विदेशी प्रजातियाँ देखी गईं, जिन्हें देखने के लिए बर्ड वॉचर उत्साहित नजर आए।
अभियान का मुख्य उद्देश्य पक्षियों की संख्या, प्रवास पैटर्न और उनके आवासों की स्थिति का अध्ययन करना था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सर्वे न केवल जैव विविधता के संरक्षण में मददगार होते हैं, बल्कि पर्यावरणीय बदलावों के संकेतक भी साबित होते हैं। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि एकत्रित डेटा का उपयोग आगे की संरक्षण नीतियों और पर्यावरणीय योजनाओं में किया जाएगा।
अभियान में शामिल कई नए और अनुभवी बर्ड वॉचर ने इसे बेहद उत्साहजनक अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता और पक्षियों की विविधता ने उन्हें प्रकृति के और भी करीब ला दिया है।
इस अभियान ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक विरासत के लिए न केवल देश में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी विशेष महत्व रखता है।





