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नेपाल: प्रदर्शन में जान गंवाने वाले Gen-Z युवाओं को मिलेगा ‘बलिदानी’ का दर्जा, कार्की सरकार ने 10 लाख की आर्थिक मदद की घोषणा की

काठमांडू। नेपाल में हाल ही में भड़के प्रदर्शनों के दौरान अपनी जान गंवाने वाले युवाओं को कार्की सरकार ने ‘बलिदानी’ का दर्जा देने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री सुशीला कार्की की देखरेख में हुई मंत्रिपरिषद की आपात बैठक में यह अहम निर्णय लिया गया। इसके तहत मृतकों के परिजनों को 10 लाख नेपाली रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। साथ ही उनके नाम पर स्मारक और शहीद स्तंभ बनाने पर भी विचार किया जा रहा है।

Gen-Z आंदोलन की पृष्ठभूमि
नेपाल में बीते हफ्तों से चल रहे व्यापक प्रदर्शनों में मुख्य रूप से युवा वर्ग, विशेषकर Gen-Z माने जाने वाले छात्रों और नई पीढ़ी के नागरिकों की भागीदारी रही। आंदोलन का केंद्रबिंदु राजनीतिक सुधार, भ्रष्टाचार पर लगाम और रोजगार के अवसरों की मांग रही है। इन प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों और युवाओं के बीच कई जगह टकराव हुए, जिनमें कुछ युवाओं की मौत हो गई।

सरकार का बड़ा फैसला
कार्की कैबिनेट ने स्पष्ट किया कि जो भी युवा इन प्रदर्शनों के दौरान मारे गए, उन्हें ‘बलिदानी’ का दर्जा दिया जाएगा। उनके परिजनों को 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि मिलेगी। साथ ही मृतकों के परिवारों के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने पर भी विचार चल रहा है। सरकार का कहना है कि यह कदम युवाओं के बलिदान को सम्मान देने और देश में स्थिरता बनाए रखने के लिए जरूरी है।

पीएम कार्की का बयान
प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने कहा, “यह सिर्फ आर्थिक मदद नहीं है, बल्कि उन युवाओं को श्रद्धांजलि है जिन्होंने देश की आवाज बुलंद करने के लिए अपना जीवन गंवाया। उनकी कुर्बानी को भुलाया नहीं जाएगा।”

विपक्ष ने जताई प्रतिक्रिया
विपक्षी दलों ने सरकार के फैसले का स्वागत तो किया, लेकिन साथ ही सवाल उठाए कि अगर सरकार ने युवाओं की चिंताओं को पहले ही गंभीरता से लिया होता तो इतनी जानें नहीं जातीं। विपक्ष का कहना है कि सरकार को अब आंदोलन की जड़ों को समझकर ठोस राजनीतिक और आर्थिक सुधार करने होंगे।

आगे की राह
मंत्रिपरिषद ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सभी मृतकों के परिवारों की सूची तैयार कर तुरंत आर्थिक सहायता पहुंचाई जाए। साथ ही जिला स्तर पर स्मृति सभाएं आयोजित की जाएंगी ताकि समाज में शांति और आपसी विश्वास का संदेश दिया जा सके।

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