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नेपाल की बाढ़ के बाद भारत-चीन में सहयोग पर सहमति, नदी डेटा साझा करने और सीमा प्रबंधन पर बढ़ेगा तालमेल

नई दिल्ली। नेपाल में आई भीषण बाढ़ और उससे पैदा हुए क्षेत्रीय संकट के बीच भारत और चीन ने साझा नदियों के प्रबंधन और सीमा से जुड़े मामलों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। दोनों देशों के बीच नदी के जलप्रवाह से संबंधित आंकड़ों को साझा करने और आपदा प्रबंधन में बेहतर समन्वय की जरूरत पर जोर दिया गया है।

नेपाल में हालिया फ्लैश फ्लड से बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है। इसका असर भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों पर भी पड़ने की आशंका के बीच नदी जलस्तर और जलप्रवाह की सही जानकारी समय पर मिलना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नेपाल में बाढ़ के बाद भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में भी प्रशासन को सतर्क किया गया है।

भारत-चीन के बीच साझा नदियों से जुड़े आंकड़ों का आदान-प्रदान बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। समय पर जलप्रवाह की जानकारी मिलने से निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को पहले से चेतावनी देने और राहत-बचाव की तैयारी करने में मदद मिल सकती है।

इसके साथ ही दोनों देशों के बीच सीमा प्रबंधन को लेकर भी सहयोग और संवाद जारी रखने पर जोर है। भारत लगातार वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति और स्थिरता को द्विपक्षीय संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बताता रहा है। चीन ने भी हाल में सीमा पर स्थिति को सामान्य तौर पर स्थिर बताया था और दोनों पक्षों के बीच राजनयिक एवं सैन्य स्तर पर बातचीत जारी रखने की बात कही थी।

नेपाल में आई आपदा ने हिमालयी क्षेत्र में नदी और जल संसाधनों से जुड़े देशों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता को एक बार फिर सामने ला दिया है। भारत के लिए खास तौर पर यह सहयोग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नेपाल और चीन से निकलने वाली कई नदियां भारतीय भूभाग से होकर गुजरती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित रूप से नदी संबंधी आंकड़ों का आदान-प्रदान, आपदा की पूर्व चेतावनी और सीमावर्ती क्षेत्रों में समन्वय से भविष्य में बाढ़ के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।

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