नई दिल्ली। भगोड़ा हीरा कारोबारी नीरव मोदी को भारत प्रत्यर्पित किए जाने के बाद कथित तौर पर मानसिक और शारीरिक यातनाओं का डर सताने लगा है। अदालत में हाल ही में दाखिल याचिका में मोदी ने यह गुहार लगाई है कि उन्हें भारत में उचित सुरक्षा और संरक्षण प्रदान किया जाए, ताकि गिरफ्तारी और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की प्रताड़ना या अमानवीय व्यवहार का सामना न करना पड़े।
याचिका में मोदी ने बताया कि भारत में लंबी कानूनी प्रक्रिया और जेल की स्थितियों के कारण उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा है। उन्होंने न्यायालय से आग्रह किया है कि उनकी मानवाधिकार सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उन्हें ऐसी परिस्थितियों में रखा जाए जहाँ उन्हें किसी तरह की शारीरिक या मानसिक यातना का सामना न करना पड़े।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की याचिका अक्सर प्रत्यर्पित मामलों में दायर की जाती है, विशेषकर जब आरोपी का आरोप वित्तीय अपराध या उच्च स्तरीय भ्रष्टाचार से जुड़ा होता है। उनका उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुरक्षा की गारंटी लेना होता है।
भारतीय न्यायालय ने अभी तक याचिका पर सुनवाई की तारीख तय नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि मोदी की सुरक्षा और जेल में उचित परिस्थितियों का ध्यान रखा जाएगा, लेकिन कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही निर्णय लिया जाएगा।
इस मामले में नीरव मोदी के प्रत्यर्पण ने देश की वित्तीय संस्थाओं और न्याय व्यवस्था के सामने महत्वपूर्ण संदेश भी भेजा है, जबकि उसका मानवाधिकार पहलू भी अंतरराष्ट्रीय निगाहों में आ गया है।





