Friday, February 27, 2026

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नारायण मूर्ति ने युवाओं को फिर चेताया: ’70 घंटे काम’ की सलाह के बाद अब AI पर दिया बड़ा बयान; बोले- “इंसानी दिमाग का विकल्प नहीं है तकनीक”

बेंगलुरु: इंफोसिस के संस्थापक और भारतीय आईटी उद्योग के दिग्गज एन.आर. नारायण मूर्ति, जो अपने ‘सप्ताह में 70 घंटे काम’ वाले बयान के लिए चर्चा में रहे थे, ने एक बार फिर युवाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए अलर्ट किया है। एक वैश्विक व्यापार सम्मेलन को संबोधित करते हुए मूर्ति ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती शक्ति और नौकरियों पर इसके प्रभाव को लेकर बड़ी बात कही। उन्होंने युवाओं से तकनीक से डरने के बजाय उसे अपनाने की अपील की, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि मशीन कभी भी इंसान की जगह नहीं ले सकती।

AI पर नारायण मूर्ति का ‘विजन’: अवसर या खतरा?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण नौकरियों के जाने के डर पर मूर्ति ने एक सकारात्मक और संतुलित दृष्टिकोण पेश किया:

  • इंसानी दिमाग सर्वोच्च: मूर्ति ने कहा कि AI केवल एक साधन है, साध्य नहीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि “इंसानी दिमाग सबसे शक्तिशाली मशीन है” और तर्क, अंतर्ज्ञान (Intuition) और जटिल समस्याओं को सुलझाने की क्षमता केवल मनुष्यों के पास है।
  • उत्पादकता में बढ़ोतरी: उनके अनुसार, AI युवाओं को उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद करेगा। जो काम पहले घंटों में होता था, उसे अब मिनटों में किया जा सकेगा, जिससे रचनात्मक कार्यों के लिए अधिक समय मिलेगा।
  • तकनीक का इतिहास: उन्होंने उदाहरण दिया कि जैसे कंप्यूटर और इंटरनेट के आने पर नौकरियों के खत्म होने का डर था, लेकिन अंततः उन्होंने लाखों नए अवसर पैदा किए, वैसे ही AI भी नए क्षेत्रों के द्वार खोलेगा।

युवाओं को ‘अलर्ट’: केवल डिग्री काफी नहीं

नारायण मूर्ति ने युवाओं को आगाह किया कि बदलते दौर में केवल शैक्षणिक डिग्रियां काम नहीं आएंगी:

  1. निरंतर सीखना (Lifelong Learning): उन्होंने कहा कि तकनीक हर छह महीने में बदल रही है, इसलिए युवाओं को हमेशा ‘सीखने की मुद्रा’ में रहना होगा।
  2. अनुशासन और कड़ी मेहनत: अपने ’70 घंटे’ वाले पुराने रुख पर कायम रहते हुए उन्होंने संकेत दिया कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए कड़ी मेहनत का कोई शॉर्टकट नहीं है।
  3. अनुकूलन क्षमता (Adaptability): जो युवा नई तकनीकों (जैसे जेनरेटिव AI) के साथ खुद को नहीं ढालेंगे, वे पिछड़ जाएंगे।

70 घंटे काम वाले बयान पर स्पष्टीकरण

समारोह के दौरान जब उनसे उनके पुराने विवादित बयान के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया:

  • उनका उद्देश्य युवाओं को ‘वर्कहोलिक’ बनाना नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के लिए उनकी ऊर्जा का सही उपयोग करना था।
  • उन्होंने तर्क दिया कि भारत जैसे विकासशील देश को विकसित देशों के बराबर खड़ा करने के लिए अगली पीढ़ी को अपनी पूरी क्षमता से काम करना होगा।

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