मुख्य समाचार: आज के डिजिटल युग में प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं है, इस बात को एक बार फिर सच कर दिखाया है कक्षा दो के एक नन्हे छात्र ने। इस मेधावी छात्र ने अपनी रचनात्मकता और तकनीकी कौशल के दम पर राष्ट्रीय कीर्तिमान (National Record) स्थापित करते हुए ‘शॉर्ट्स रील्स’ (Shorts Reels) प्रतियोगिता में देश भर में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। नन्हे बालक की इस उपलब्धि ने न केवल उसके स्कूल और माता-पिता का सिर गर्व से ऊंचा किया है, बल्कि डिजिटल कंटेंट निर्माण के क्षेत्र में बच्चों की बढ़ती संभावनाओं को भी रेखांकित किया है।
कैसे मिली यह ऐतिहासिक उपलब्धि?
राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित इस डिजिटल क्रिएटिविटी प्रतियोगिता में हजारों प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था:
- विषय और प्रस्तुति: छात्र ने शिक्षा, सामाजिक संदेश या मनोरंजन (संदर्भानुसार) पर आधारित एक बेहद प्रभावशाली वीडियो रील तैयार की थी।
- जजों का फैसला: विशेषज्ञों के पैनल ने छात्र की आत्मविश्वासपूर्ण प्रस्तुति, वीडियो की एडिटिंग बारीकियों और विषय की मौलिकता को देखते हुए उसे ‘सर्वश्रेष्ठ’ चुना।
- बनी मिसाल: इतनी कम उम्र में कैमरे के सामने बेझिझक बोलना और डिजिटल माध्यमों का सकारात्मक उपयोग करना छात्र की सबसे बड़ी खूबी रही।
परिजनों और शिक्षकों में खुशी की लहर
छात्र की इस जीत की खबर मिलते ही स्कूल और घर पर उत्सव का माहौल है:
- स्कूल का सम्मान: स्कूल प्रबंधन ने छात्र को विशेष असेंबली में सम्मानित करने का निर्णय लिया है। शिक्षकों का कहना है कि यह छात्र पढ़ाई के साथ-साथ अन्य गतिविधियों में भी हमेशा अव्वल रहता है।
- अभिभावकों का समर्थन: छात्र के माता-पिता ने बताया कि उनके बच्चे को बचपन से ही नई चीजें सीखने और कैमरे के साथ प्रयोग करने का शौक था। उन्होंने हमेशा उसके शौक को सही दिशा देने का प्रयास किया।
डिजिटल युग का उभरता सितारा
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘शॉर्ट्स’ और ‘रील्स’ जैसे मंचों का यदि सही और रचनात्मक उपयोग किया जाए, तो यह बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने में सहायक हो सकता है:
- रचनात्मक विकास: ऐसी प्रतियोगिताएं बच्चों को तकनीक के साथ-साथ कहानी कहने (Storytelling) की कला भी सिखाती हैं।
- राष्ट्रीय पहचान: एक छोटा सा वीडियो किस तरह राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिला सकता है, यह इस नन्हे छात्र ने साबित कर दिखाया है।





