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नक्सलवाद पर किरेन रिजिजू का बड़ा दावा: राहुल गांधी जानते हैं वामपंथी उग्रवादियों को; कई कांग्रेसी नेताओं का नक्सलियों से सीधा संबंध

नई दिल्ली: देश में नक्सलवाद (वामपंथी उग्रवाद) के संवेदनशील मुद्दे पर सियासत एक बार फिर चरम पर पहुँच गई है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पार्टी और उसके शीर्ष नेतृत्व, विशेष रूप से राहुल गांधी पर, नक्सलवाद को लेकर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। रिजिजू ने दावा किया कि कांग्रेस के कुछ प्रमुख नेताओं के वामपंथी उग्रवादियों और माओवादियों से सीधे संबंध रहे हैं, जो देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। उनके इस तीखे बयान से देश का राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है और आरोप-प्रत्यारोप का एक नया दौर शुरू हो गया है।

राहुल गांधी और वामपंथी उग्रवादियों के बीच ‘जान-पहचान’ का दावा

किरेन रिजिजू ने अपने बयान में सीधे तौर पर राहुल गांधी का नाम लेते हुए कहा कि वे वामपंथी उग्रवादियों को अच्छी तरह जानते हैं और उनके बीच एक ‘जान-पहचान’ का रिश्ता है। रिजिजू ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने कभी भी नक्सलवाद की कड़ी निंदा नहीं की और न ही उनके खिलाफ कोई ठोस कदम उठाया, जो उनके ‘मौन समर्थन’ को दर्शाता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह देश के लिए एक चिंता का विषय है कि एक प्रमुख राजनीतिक दल का नेता उन लोगों के साथ संबंध रखता है जो देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और सुरक्षा बलों को चुनौती देते हैं।

कई कांग्रेसी नेताओं का नक्सलियों से संबंध: रिजिजू का आरोप

रिजिजू ने केवल राहुल गांधी पर ही नहीं, बल्कि कांग्रेस पार्टी के कई अन्य नेताओं पर भी नक्सलियों और माओवादियों के साथ संबंध रखने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के शासनकाल के दौरान नक्सलवाद को फलने-फूलने का मौका मिला, क्योंकि सरकार ने उनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की और न ही उनके वित्तपोषण के स्रोतों को खत्म करने का प्रयास किया। रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस के कुछ नेता नक्सलियों को राजनीतिक संरक्षण प्रदान करते थे और उनके ‘वैचारिक समर्थकों’ को सरकारी संस्थानों में महत्त्वपूर्ण पद दिए गए, जो देश की सुरक्षा के साथ एक बड़ा खिलवाड़ था।

राजनीतिक गरमाहट और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज

किरेन रिजिजू के इस बयान के बाद, कांग्रेस पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और उनके आरोपों को पूरी तरह निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि रिजिजू का बयान सुरक्षा बलों के बलिदान और वीरता का अपमान है, जिन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में अपनी जान की बाजी लगा दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए कई महत्त्वपूर्ण कदम उठाए थे, और अमित शाह के आरोप पूरी तरह निराधार हैं। संसद में भी इस मुद्दे पर तीखी बहस होने की संभावना है, क्योंकि दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ नक्सलवाद के मुद्दे पर बहस कर रहे हैं।

यह मुद्दा देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाती है, और आने वाले दिनों में भी सियासत के केंद्र में रहने की संभावना है।

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