नई दिल्ली जल्द ही वैश्विक सांस्कृतिक मानचित्र पर एक ऐतिहासिक पहचान बनाने जा रही है। 2026 के अंत तक भारत को दुनिया का सबसे बड़ा संग्रहालय — युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय— मिलने जा रहा है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना सेंट्रल विस्टा रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का हिस्सा है और इसे भारतीय इतिहास, कला, संस्कृति और विरासत का सबसे व्यापक संग्रहालय माना जा रहा है।
यह म्यूज़ियम केवल एक प्रदर्शनी स्थल नहीं होगा, बल्कि भारत की निरंतर सभ्यतागत यात्रा का जीवंत दस्तावेज़ होगा, जो सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर आधुनिक भारत तक के सफर को विस्तार से प्रस्तुत करेगा।
युगे युगेन भारत म्यूज़ियम: आकार और भव्यता
950 कमरे, 1.55 लाख वर्ग मीटर का विशाल परिसर
यह संग्रहालय 1.55 लाख वर्ग मीटर क्षेत्रफल में फैला होगा और इसमें 950 कमरे होंगे। इतनी विशाल संरचना इसे न केवल भारत का, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा म्यूज़ियम बनाएगी।
यह परिसर राष्ट्रपति भवन के आसपास स्थित नॉर्थ और साउथ ब्लॉक्स में विकसित किया जा रहा है, जिससे ऐतिहासिक वास्तुकला और आधुनिक डिज़ाइन का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।
‘एवरलास्टिंग इंडिया’ — संग्रहालय की आत्मा
थीम: युगे युगेन भारत (Everlasting India)
इस संग्रहालय की केंद्रीय अवधारणा है — ‘‘युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय”, यानी शाश्वत भारत। इसका उद्देश्य यह दिखाना है कि भारतीय सभ्यता सदियों से निरंतर विकसित होती रही है, लेकिन अपनी मूल पहचान बनाए रखी है।
यह थीम आगंतुकों को प्राचीन भारत, मध्यकालीन भारत, औपनिवेशिक काल और स्वतंत्र भारत की यात्रा पर ले जाएगी।
गैलरियाँ और थीमेटिक ज़ोन
30 गैलरियाँ, 8 थीमेटिक ज़ोन
म्यूज़ियम में कुल 30 गैलरियाँ होंगी, जिन्हें 8 अलग-अलग थीमेटिक ज़ोन में विभाजित किया जाएगा। इनमें शामिल होंगे:
- प्राचीन सभ्यताएँ
- धार्मिक और दार्शनिक परंपराएँ
- कला और शिल्प
- विज्ञान और ज्ञान परंपराएँ
- स्वतंत्रता संग्राम
- आधुनिक भारत
- सांस्कृतिक विविधता
- डिजिटल और इंटरैक्टिव इतिहास
यह विभाजन संग्रहालय को शिक्षाप्रद और रोचक दोनों बनाएगा।
क्या-क्या देखने को मिलेगा?
आगंतुक यहाँ कई अनमोल धरोहरें देख पाएंगे, जैसे:
- प्राचीन पांडुलिपियाँ
- दुर्लभ सिक्के
- ऐतिहासिक मूर्तियाँ
- भित्ति चित्र और भित्तिलेख
- शिलालेख और पुरातात्विक अवशेष
- ऐतिहासिक स्क्रॉल
- ऑडियो-विज़ुअल डिस्प्ले
- डिजिटल और इंटरैक्टिव प्रस्तुतियाँ
इससे यह संग्रहालय केवल देखने का नहीं, बल्कि सीखने का अनुभव बनेगा।
लौवर से भी बड़ा — भारत की ऐतिहासिक छलांग
दुनिया का सबसे बड़ा संग्रहालय बनने की ओर
निर्माण पूरा होने के बाद यह संग्रहालय पेरिस के प्रसिद्ध लौवर म्यूज़ियम को भी पीछे छोड़ देगा और दुनिया का सबसे बड़ा संग्रहालय बन जाएगा।
यह भारत के लिए गर्व का क्षण होगा और वैश्विक पर्यटन को भी नई दिशा देगा।
इंडो-फ्रेंच सहयोग और डिज़ाइन दर्शन
फ्रांस के साथ तकनीकी साझेदारी
19 दिसंबर 2024 को “युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय” और फ्रांस म्यूज़ियम डेवलपमेंट के बीच तकनीकी सहयोग समझौता हुआ। इसका उद्देश्य संग्रहालय को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर विकसित करना है।
आर्किटेक्चर: विरासत + आधुनिकता
इस परियोजना का डिज़ाइन Arcop Associates के नेतृत्व में किया जा रहा है, जिसके प्रमुख डिज़ाइनर थाई वास्तुकार कुलापट यंत्रसास्त हैं। डिज़ाइन में Adaptive Reuse Approach अपनाई जा रही है, यानी ऐतिहासिक इमारतों को पूरी तरह बदले बिना आधुनिक संग्रहालय में रूपांतरित किया जाएगा।
नेशनल म्यूज़ियम का भविष्य
वर्तमान में जनपथ स्थित नेशनल म्यूज़ियम को इस नए परिसर में स्थानांतरित किया जाएगा। यानी पुराना संग्रहालय बंद नहीं होगा, बल्कि और भव्य रूप में पुनर्जीवित होगा।
पर्यटन और शिक्षा पर प्रभाव
यह संग्रहालय न केवल पर्यटकों को आकर्षित करेगा, बल्कि छात्रों, शोधकर्ताओं और इतिहास प्रेमियों के लिए भी ज्ञान का विशाल केंद्र बनेगा। यह परियोजना दिल्ली को वैश्विक सांस्कृतिक राजधानी के रूप में स्थापित करेगी।
2026 का अंत भारत के सांस्कृतिक इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। ‘युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय केवल एक संग्रहालय नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, इतिहास और पहचान का भव्य प्रतिबिंब होगा। यह परियोजना यह साबित करती है कि भारत अपनी विरासत को सहेजते हुए आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है।





