Wednesday, February 11, 2026

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धौलास जमीन विवाद पर CM धामी का कड़ा रुख: ‘देवभूमि में विधर्मी मंशा को सफल नहीं होने देंगे’; भू-कानून और जनसांख्यिकीय बदलाव पर दी चेतावनी

देहरादून: राजधानी देहरादून के निकटवर्ती क्षेत्र धौलास में हाल ही में हुए एक विवादित भूमि सौदे और वहां अवैध निर्माण की कोशिशों ने राजनीतिक व सामाजिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़ा संदेश जारी किया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि “देवभूमि उत्तराखंड की पवित्रता और यहां की जनसांख्यिकी (Demography) से छेड़छाड़ करने वाली किसी भी ‘विधर्मी मंशा’ को सरकार सफल नहीं होने देगी।” उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में जमीन खरीद-फरोख्त के नियमों का उल्लंघन करने वालों और संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ तत्काल और कठोरतम कार्रवाई की जाए।

क्या है धौलास जमीन विवाद?

देहरादून के पॉश और शांत पहाड़ी इलाके धौलास में पिछले कुछ दिनों से तनाव की स्थिति बनी हुई थी:

  • संदिग्ध खरीद-फरोख्त: आरोप है कि एक विशेष समुदाय से जुड़े बाहरी व्यक्तियों द्वारा स्थानीय जमीन खरीदी गई और वहां बिना अनुमति के बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य शुरू किया गया।
  • स्थानीय विरोध: ग्रामीणों और हिंदूवादी संगठनों ने इस निर्माण का विरोध करते हुए इसे ‘लैंड जिहाद’ और इलाके की शांति भंग करने की कोशिश बताया।
  • अवैध निर्माण पर कार्रवाई: विरोध के बाद प्रशासन ने जांच में पाया कि निर्माण कार्य के पास आवश्यक तकनीकी स्वीकृतियां नहीं थीं, जिसके बाद उसे रोकने के आदेश दिए गए।

मुख्यमंत्री का कड़ा प्रहार: “सख्त भू-कानून की ओर बढ़ रही सरकार”

मुख्यमंत्री धामी ने इस विवाद के परिप्रेक्ष्य में अपनी सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया:

  1. वेरिफिकेशन अभियान: मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे प्रदेश में ‘सत्यापन अभियान’ को और तेज किया जाएगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि बाहर से आकर जमीन खरीदने वालों का पिछला रिकॉर्ड और उद्देश्य क्या है।
  2. भू-कानून में सख्ती: उन्होंने दोहराया कि सरकार एक सख्त भू-कानून लाने पर काम कर रही है, जो बाहरी लोगों द्वारा प्रदेश की कृषि और ग्रामीण भूमि के अंधाधुंध दोहन पर रोक लगाएगा।
  3. मंशा पर सवाल: मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति गलत नाम से या अपनी पहचान छुपाकर देवभूमि में पैर जमाने की कोशिश करेगा, तो कानून उसके साथ सख्ती से निपटेगा।

प्रशासनिक सतर्कता: इंटेलिजेंस को किया गया सक्रिय

धौलास की घटना के बाद शासन ने खुफिया विभाग (LIU) को भी अलर्ट पर रखा है:

  • अतिक्रमण की जांच: केवल निजी जमीन ही नहीं, बल्कि वन भूमि और सरकारी भूमि पर हो रहे अतिक्रमणों की भी बारीकी से जांच की जा रही है।
  • कलेक्टरों को निर्देश: सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में होने वाले बड़े भूमि सौदों की निगरानी करें, विशेषकर उन क्षेत्रों में जो रणनीतिक या धार्मिक रूप से संवेदनशील हैं।

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