देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में सड़कों की बदहाली और जगह-जगह हो रही बेतरतीब खुदाई से जनता को हो रही परेशानी को देखते हुए जिलाधिकारी (DM) सविन बंसल ने कड़ा रुख अपनाया है। शहर के सौंदर्यीकरण और सुगम यातायात के दावों के बीच लापरवाही बरतने वाली सात प्रमुख कार्यदायी संस्थाओं के खुदाई परमिट तत्काल प्रभाव से निरस्त (Cancel) कर दिए गए हैं। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि निर्माण कार्यों के नाम पर शहर की सड़कों को लंबे समय तक खोदकर नहीं छोड़ा जा सकता। यह कार्रवाई उन एजेंसियों पर की गई है जिन्होंने निर्धारित समय सीमा के भीतर काम पूरा नहीं किया या सड़क की खुदाई के बाद उसकी मरम्मत और धूल नियंत्रण के मानकों की अनदेखी की।
क्यों हुई इतनी सख्त कार्रवाई?
देहरादून की सड़कों पर चल रहे विभिन्न प्रोजेक्ट्स (स्मार्ट सिटी, जल संस्थान, और गैस पाइपलाइन आदि) के कारण आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था:
- लापरवाही का आलम: खुदाई के बाद कई स्थानों पर सड़क को समतल नहीं किया गया, जिससे आए दिन सड़क हादसे हो रहे थे।
- धूल और प्रदूषण: निर्माण कार्यों के दौरान मानकों के विपरीत धूल उड़ने से लोगों को सांस लेने में दिक्कत और आंखों की बीमारियों की शिकायत हो रही थी।
- ट्रैफिक जाम: मुख्य चौराहों और व्यस्त मार्गों पर खुदाई के कारण घंटों जाम लग रहा था, जिससे स्कूल जाने वाले बच्चों और ऑफिस जाने वाले लोगों को परेशानी हो रही थी।
डीएम के कड़े निर्देश: अब क्या होगा आगे?
जिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट में हुई समीक्षा बैठक के दौरान सभी विभागों को चेतावनी देते हुए नई गाइडलाइंस जारी की हैं:
- खुदाई पर पूर्ण प्रतिबंध: जिन सात एजेंसियों के परमिट रद्द किए गए हैं, वे अब अगले आदेश तक शहर में कहीं भी नई खुदाई नहीं कर सकेंगी।
- सड़क मरम्मत अनिवार्य: एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि जहाँ पहले से खुदाई हो चुकी है, वहां सबसे पहले पैच वर्क और सड़क की मूल स्थिति बहाल करने का काम पूरा किया जाए।
- भारी जुर्माने की चेतावनी: यदि इसके बाद भी कोई एजेंसी बिना अनुमति या मानकों के विरुद्ध खुदाई करती पाई गई, तो उस पर भारी आर्थिक जुर्माना लगाने के साथ-साथ मुकदमा दर्ज करने की बात भी कही गई है।
इन एजेंसियों पर गिरी गाज
सूत्रों के अनुसार, कार्रवाई की जद में मुख्य रूप से जल संस्थान, ऊर्जा निगम (UPCL), स्मार्ट सिटी के ठेकेदार और निजी टेलीकॉम कंपनियां आई हैं। डीएम ने इन एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों को तलब कर जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ किया कि विकास कार्यों का स्वागत है, लेकिन इसकी कीमत जनता की सुरक्षा और स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर नहीं चुकाई जा सकती।




