देहरादून: राजधानी देहरादून में परिवहन व्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले ऑटो और विक्रम संचालकों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर आज ‘मुख्यमंत्री आवास कूच’ का एलान किया। दून ऑटो यूनियन के बैनर तले सैकड़ों की संख्या में एकत्रित हुए चालक जब परेड ग्राउंड से मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़े, तो पुलिस ने उन्हें बैरिकेडिंग लगाकर रास्ते में ही रोक लिया। इससे आक्रोशित होकर ऑटो चालक सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं का ठोस समाधान नहीं होता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। इस विरोध प्रदर्शन के कारण राजपुर रोड, ईसी रोड और सर्वे चौक जैसे प्रमुख इलाकों में घंटों तक वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं और आम जनता को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।
ऑटो यूनियन की प्रमुख मांगें
यूनियन के नेताओं ने सरकार के सामने अपनी मांगों की एक लंबी फेहरिस्त रखी है, जिन पर वे तत्काल कार्रवाई चाहते हैं:
- रूट विस्तार और परमिट: ऑटो संचालकों की मांग है कि शहर के बढ़ते दायरे को देखते हुए उनके रूटों का विस्तार किया जाए और नए परमिट जारी करने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए।
- चालान की कार्रवाई पर रोक: चालकों का आरोप है कि ट्रैफिक पुलिस द्वारा बेवजह भारी भरकम चालान काटे जा रहे हैं, जिससे उनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है।
- स्मार्ट सिटी और पार्किंग: यूनियन का कहना है कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत उनके पुराने स्टैंड हटा दिए गए हैं, लेकिन नए पार्किंग स्थल की व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे उन्हें वाहन खड़ा करने में परेशानी होती है।
- ई-रिक्शा पर नियंत्रण: शहर के मुख्य मार्गों पर अनियंत्रित तरीके से चल रहे ई-रिक्शा के कारण ऑटो व्यवसाय को हो रहे नुकसान पर भी चालकों ने रोष व्यक्त किया है।
पुलिस और प्रशासन के साथ तीखी नोकझोंक
प्रदर्शन के दौरान कई बार पुलिस और ऑटो चालकों के बीच धक्का-मुक्की और तीखी बहस भी देखने को मिली:
- भारी सुरक्षा बल तैनात: प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने पहले ही भारी पुलिस बल और पीएसी (PAC) तैनात कर दी थी।
- बैरिकेडिंग पर प्रदर्शन: जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को मुख्यमंत्री आवास से काफी दूर रोक लिया, तो चालक वहीं सड़क पर लेट गए, जिससे ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो गया।
- वार्ता की कोशिश: प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुँचकर यूनियन के प्रतिनिधियों को समझाने और मुख्यमंत्री कार्यालय तक उनकी बात पहुँचाने का आश्वासन दिया, लेकिन चालक मौके पर ही निर्णय की मांग पर अड़े रहे।
आम जनता की बढ़ी मुश्किलें
हजारों ऑटो और विक्रमों के पहिए थमने से शहर की रफ्तार सुस्त पड़ गई:
- स्कूली बच्चे और दफ्तर यात्री परेशान: सुबह के समय हुए इस प्रदर्शन के कारण स्कूल जाने वाले बच्चों और दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
- विकल्पों की कमी: ऑटो न चलने के कारण शहर में बसों और ई-रिक्शा पर भारी दबाव देखा गया, जिससे कई लोग गंतव्य तक पहुँचने के लिए पैदल चलने को मजबूर हुए।
निष्कर्ष: समाधान की उम्मीद में आंदोलन
देहरादून की ट्रैफिक व्यवस्था में ऑटो और विक्रमों की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। दून ऑटो यूनियन के इस शक्ति प्रदर्शन ने सरकार को सोचने पर मजबूर कर दिया है। फिलहाल, यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं दिया, तो वे चक्का जाम जैसे और भी कड़े कदम उठा सकते हैं।





