Monday, January 12, 2026

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देहरादून नगर निगम टेंडर घोटाला: जांच समिति आज सौंपेगी फाइनल रिपोर्ट; भ्रष्टाचार की आंच में झुलस सकते हैं कई रसूखदार अधिकारी

देहरादून/ब्यूरो: राजधानी के नगर निगम में पिछले लंबे समय से चर्चाओं में रहे टेंडर घोटाले की परतें अब खुलने वाली हैं। शासन द्वारा गठित उच्च स्तरीय जांच समिति आज अपनी अंतिम रिपोर्ट (Final Report) सौंपने जा रही है। सूत्रों की मानें तो इस रिपोर्ट में कई गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि हुई है, जिसके बाद निगम के कई बड़े अधिकारियों की कुर्सी पर खतरा मंडराने लगा है। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) इस रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी में है।

क्या है पूरा घोटाला?

नगर निगम देहरादून में हुए इस कथित घोटाले ने तब तूल पकड़ा जब कई निर्माण कार्यों और कूड़ा निस्तारण से संबंधित टेंडर प्रक्रियाओं में धांधली की शिकायतें सामने आईं:

  • नियमों की अनदेखी: आरोप है कि चहेती कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर की शर्तों को बदला गया और ई-टेंडरिंग की प्रक्रिया में तकनीकी हेराफेरी की गई।
  • बजट का दुरुपयोग: विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये का भुगतान तो कर दिया गया, लेकिन धरातल पर काम की गुणवत्ता मानकों के विपरीत पाई गई।
  • बिना काम के भुगतान: जांच में यह भी बिंदु शामिल है कि कुछ मामलों में काम पूरा होने से पहले ही ठेकेदारों को बिलों का भुगतान कर दिया गया।

जांच रिपोर्ट में ‘विस्फोटक’ खुलासे की उम्मीद

आज आने वाली फाइनल रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं:

  1. अफसरों और ठेकेदारों का गठजोड़: जांच समिति ने पिछले कई महीनों के दस्तावेजों, बैंक ट्रांजेक्शन और फाइलों का बारीकी से निरीक्षण किया है, जिसमें अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच संदिग्ध सांठगांठ के प्रमाण मिले हैं।
  2. लाखों का गबन: शुरुआती संकेतों के अनुसार, इस घोटाले की राशि करोड़ों में हो सकती है, जिससे सरकारी खजाने को भारी चपत लगी है।
  3. गवाहों के बयान: जांच दल ने निगम के कई छोटे कर्मचारियों और शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज किए हैं, जो बड़े अधिकारियों की संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं।

इन पर गिर सकती है गाज

सूत्रों के अनुसार, जांच की रडार पर निगम के कुछ वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, अभियंत्रण (Engineering) विभाग के अधिकारी और लेखा अनुभाग के कर्मचारी शामिल हैं। रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद संबंधित अधिकारियों को निलंबित करने या उनके खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने की सिफारिश की जा सकती है।

प्रशासनिक सतर्कता और आगामी कदम

नगर निगम के वर्तमान माहौल में भारी बेचैनी देखी जा रही है।

  • सतर्कता विभाग की नजर: शासन स्तर पर यह भी चर्चा है कि यदि रिपोर्ट में भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो मामला आगे की जांच के लिए विजिलेंस (Vigilance) को सौंपा जा सकता है।
  • पारदर्शिता का संकल्प: शहरी विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकार भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना रही है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

निष्कर्ष: भ्रष्टाचार पर प्रहार का समय

देहरादून नगर निगम का यह मामला केवल एक घोटाले की जांच नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक धन की सुरक्षा और पारदर्शिता की परीक्षा भी है। आज शाम तक रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि किन-किन ‘चेहरों’ से नकाब उतरने वाला है।

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