देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की पहचान और स्थापत्य कला का एक जीवंत हिस्सा रही 90 साल पुरानी ऐतिहासिक इमारत अब इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रही है। शहर के हृदय स्थल पर स्थित इस शानदार भवन को ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह वही इमारत है जिसकी बनावट और भव्यता कभी दिल्ली के प्रसिद्ध ‘कनाट प्लेस’ (Connaught Place) की याद दिलाती थी।
स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना
90 वर्ष पूर्व निर्मित यह इमारत अपनी विशिष्ट वास्तुकला के लिए जानी जाती थी। बताया जाता है कि इसका डिजाइन और गोल स्तंभों वाली संरचना दिल्ली के कनाट प्लेस के ‘जॉर्जियन आर्किटेक्चर’ से प्रेरित थी। उस दौर में यह देहरादून की सबसे आधुनिक और सुंदर इमारतों में शुमार थी। अपनी विशिष्ट बनावट के कारण यह सालों तक पर्यटकों और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए आकर्षण का केंद्र रही।
स्मृति और विरासत का खोना
इमारत को तोड़े जाने की खबर से शहर के पुराने बाशिंदों और विरासत प्रेमियों में मायूसी है। बुजुर्गों का कहना है कि यह केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं था, बल्कि दून के सुनहरे दौर की गवाह थी। दशकों तक इस इमारत ने शहर के बदलते स्वरूप को देखा है। विकास की अंधी दौड़ में इस तरह की धरोहरों का ढहना शहर की सांस्कृतिक पहचान के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
ध्वस्तीकरण के पीछे के कारण
सूत्रों के अनुसार, इमारत की जर्जर स्थिति और सुरक्षा कारणों को देखते हुए इसे ध्वस्त करने का निर्णय लिया गया है। लंबे समय से रखरखाव के अभाव में इसके कुछ हिस्से खतरनाक हो गए थे। हालांकि, जमीन के नए उपयोग या वहां बनने वाली नई संरचना को लेकर अभी आधिकारिक स्पष्टीकरण आना बाकी है। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के चलते आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
विकास बनाम विरासत की बहस
इस कार्रवाई ने एक बार फिर ‘विकास बनाम विरासत’ की बहस को छेड़ दिया है। विरासत संरक्षकों का तर्क है कि यदि समय रहते प्रशासन या संबंधित पक्षों द्वारा इसके जीर्णोद्धार (Renovation) पर ध्यान दिया जाता, तो इस ऐतिहासिक ढांचे को बचाया जा सकता था। दिल्ली के कनाट प्लेस की तर्ज पर बनी यह बिल्डिंग देहरादून के उन गिने-चुने ढांचों में से एक थी जो शहर को एक ‘हेरिटेज लुक’ प्रदान करते थे।





