बागेश्वर/देहरादून: उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में मंगलवार की सुबह भूकंप के झटकों से धरती कांप उठी। रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 3.5 मापी गई। हालांकि तीव्रता मध्यम थी, लेकिन झटके इतने महसूस किए गए कि लोग डर के मारे अपने घरों और दुकानों से बाहर निकल आए। कड़ाके की ठंड और सुबह का समय होने के बावजूद लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागते नजर आए। राहत की बात यह रही कि अभी तक जिले में कहीं से भी जान-माल के नुकसान की कोई अप्रिय खबर प्राप्त नहीं हुई है।
भूकंप का समय और केंद्र
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, भूकंप की स्थिति इस प्रकार रही:
- समय: भूकंप के झटके सुबह महसूस किए गए, जब अधिकांश लोग अपने दैनिक कार्यों की शुरुआत कर रहे थे।
- केंद्र (Epicenter): भूकंप का केंद्र बागेश्वर जिले के आसपास जमीन के भीतर कम गहराई पर स्थित था। कम गहराई होने के कारण ही झटकों का अहसास स्पष्ट रूप से हुआ।
- प्रभावित क्षेत्र: बागेश्वर मुख्य बाजार के साथ-साथ कपकोट, गरुड़ और कांडा जैसे तहसील क्षेत्रों में भी झटके महसूस किए गए।
दहशत का माहौल और अफरा-तफरी
जैसे ही धरती हिलनी शुरू हुई, पूरे जिले में अफरा-तफरी मच गई:
- घरों से बाहर भागे लोग: बहुमंजिला इमारतों और पुराने मकानों में रह रहे लोग ‘भूकंप-भूकंप’ चिल्लाते हुए खुले मैदानों की ओर दौड़े।
- स्कूलों में सतर्कता: कई स्कूलों में प्रार्थना सभा के समय झटके महसूस हुए, जिसके बाद शिक्षकों ने बच्चों को तुरंत कमरों से बाहर सुरक्षित स्थानों पर एकत्रित किया।
- कड़ाके की ठंड की दोहरी मार: बाहर निकले लोगों को भारी पाले और कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ा, लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से लोग काफी देर तक अंदर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए।
प्रशासनिक सतर्कता और आपदा प्रबंधन
भूकंप के तुरंत बाद जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग सक्रिय हो गया:
- नुकसान का जायजा: जिलाधिकारी ने सभी तहसीलदारों और पटवारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में नुकसान की रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
- संवेदनशील जोन: उत्तराखंड का अधिकांश हिस्सा भूकंप की दृष्टि से ‘जोन-4’ और ‘जोन-5’ (अत्यधिक संवेदनशील) में आता है। बागेश्वर भी भूस्खलन और भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील जिला माना जाता है।
विशेषज्ञों की राय
भू-वैज्ञानिकों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र में टेक्टोनिक प्लेटों के बीच बन रहे दबाव के कारण छोटे-छोटे भूकंप आते रहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ये छोटे झटके बड़े भूकंप की चेतावनी भी हो सकते हैं, इसलिए लोगों को हमेशा जागरूक और तैयार रहने की आवश्यकता है।
निष्कर्ष: सतर्कता ही बचाव है
बागेश्वर में आया यह भूकंप एक बार फिर पहाड़ों की नाजुक पारिस्थितिकी की याद दिलाता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, बल्कि भूकंप आने पर अपनाए जाने वाले सुरक्षा मानकों का पालन करें।





