नई दिल्ली/देहरादून: यदि आप दूसरे राज्य से पुरानी गाड़ी खरीदकर अपने शहर में चलाने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। परिवहन विभाग ने अंतरराज्यीय वाहन हस्तांतरण (Inter-state Vehicle Transfer) और पंजीकरण के नियमों में व्यापक संशोधन करते हुए नई गाइडलाइन जारी कर दी है। इन नए नियमों का मुख्य उद्देश्य वाहन चोरी पर लगाम लगाना, टैक्स चोरी रोकना और पंजीकरण की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल व पारदर्शी बनाना है। नई व्यवस्था के तहत अब ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ (NOC) से लेकर टैक्स भुगतान तक की प्रक्रिया में कई कड़े प्रावधान जोड़े गए हैं।
नए नियमों की मुख्य बातें: क्या बदला है?
परिवहन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब वाहन मालिकों को निम्नलिखित प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य होगा:
- डिजिटल एनओसी (NOC) का सत्यापन: अब दूसरे राज्य के आरटीओ से प्राप्त एनओसी का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) अनिवार्य नहीं होगा। इसके बजाय, ‘वाहन’ (VAHAN) पोर्टल के माध्यम से डिजिटल सत्यापन किया जाएगा। इससे पंजीकरण में लगने वाले समय में 15 से 20 दिनों की कमी आएगी।
- स्मार्ट कार्ड और एचएसआरपी (HSRP): दूसरे राज्य की गाड़ी का नंबर बदलते ही अब पुराने नंबर की प्लेट को नष्ट करना और नई हाई-सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) लगवाना अनिवार्य होगा। इसके बिना नया आरसी (RC) कार्ड जारी नहीं किया जाएगा।
- बकाया टैक्स का मिलान: यदि पुरानी गाड़ी पर पिछले राज्य में कोई रोड टैक्स या चालान बकाया है, तो उसका डेटा अब राष्ट्रीय स्तर पर साझा किया जाएगा। बकाया राशि जमा किए बिना नए राज्य में पंजीकरण संभव नहीं होगा।
री-रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया: चरण-दर-चरण
आरटीओ ने स्पष्ट किया है कि किसी भी बाहरी राज्य के वाहन को 12 महीने से अधिक समय तक चलाने के लिए पंजीकरण बदलना कानूनी रूप से अनिवार्य है:
- पुराने आरटीओ से एनओसी: सबसे पहले मूल राज्य के आरटीओ से एनओसी लेनी होगी।
- दस्तावेजों की जांच: नए आरटीओ में आवेदन के समय मूल आरसी, बीमा पत्र, प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUC) और पते का प्रमाण देना होगा।
- चेसिस नंबर का मिलान: वाहन को भौतिक रूप से आरटीओ कार्यालय लाना होगा, जहां निरीक्षक चेसिस और इंजन नंबर का मिलान करेंगे।
- रोड टैक्स का भुगतान: वाहन की उम्र (Age) के आधार पर नए राज्य के नियमों के अनुसार रोड टैक्स जमा करना होगा।
क्यों जरूरी थे ये बदलाव?
विशेषज्ञों के अनुसार, पुरानी व्यवस्था में कई खामियां थीं जिसका फायदा उठाकर चोरी की गाड़ियां एक राज्य से दूसरे राज्य में बेच दी जाती थीं।
- अपराध पर नियंत्रण: नई गाइडलाइन के तहत डेटाबेस के एकीकरण से यह तुरंत पता चल जाएगा कि गाड़ी ब्लैकलिस्टेड या चोरी की तो नहीं है।
- बीमा दावों में आसानी: सही पंजीकरण होने से दुर्घटना की स्थिति में बीमा क्लेम मिलने में कोई कानूनी अड़चन नहीं आएगी।
- प्रदूषण मानकों का पालन: दिल्ली-एनसीआर जैसे क्षेत्रों में 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों के प्रवेश को रोकने के लिए डेटा का मिलान अब और अधिक सटीक होगा।





