नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की मुस्तैदी के दावों के बीच एक बेहद डरावनी तस्वीर सामने आई है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, पिछले महज 15 दिनों के भीतर दिल्ली के अलग-अलग इलाकों से करीब 800 लोग लापता हो गए हैं। इनमें सबसे चौंकाने वाली और चिंताजनक बात यह है कि गायब होने वालों में युवतियों और नाबालिग बच्चों की संख्या सबसे अधिक है। इस ‘मिस्ट्री’ ने न केवल पीड़ित परिवारों की रातों की नींद उड़ा दी है, बल्कि दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के सामने भी एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
आंकड़ों की भयावहता: हर दिन औसतन 50 से ज्यादा गायब
दिल्ली पुलिस के रिकॉर्ड और ‘ट्रैक द मिसिंग चाइल्ड’ पोर्टल के विश्लेषण से कुछ गंभीर तथ्य उभर कर आए हैं:
- किशोरी और महिलाएं: लापता होने वालों में 15 से 25 वर्ष की युवतियों की संख्या में अचानक उछाल देखा गया है।
- छोटे बच्चे: बाहरी दिल्ली और झुग्गी-झोपड़ी वाले इलाकों से छोटे बच्चों के गायब होने की घटनाएं सबसे ज्यादा दर्ज की गई हैं।
- हॉटस्पॉट इलाके: शाहदरा, उत्तर-पूर्वी दिल्ली और बाहरी दिल्ली के कुछ खास इलाकों को ‘सेंसिटिव’ माना जा रहा है, जहाँ से गायब होने की रिपोर्ट सबसे ज्यादा आ रही हैं।
क्या हो सकती है वजह? पुलिस की रडार पर तीन मुख्य थ्योरी
विशेषज्ञों और जांच अधिकारियों ने इन घटनाओं के पीछे तीन प्रमुख कारणों की आशंका जताई है:
- मानव तस्करी (Human Trafficking): अंदेशा है कि संगठित गिरोह सक्रिय हैं जो बच्चों को भीख मंगवाने या बंधुआ मजदूरी के लिए और युवतियों को अनैतिक देह व्यापार के लिए निशाना बना रहे हैं।
- सोशल मीडिया और प्रेम प्रसंग: पुलिस का कहना है कि कई मामलों में किशोरियां सोशल मीडिया पर अनजान लोगों के झांसे में आकर या घर वालों की नाराजगी के चलते खुद घर छोड़कर चली जाती हैं।
- अपहरण और आपसी रंजिश: कुछ मामलों में फिरौती या आपसी दुश्मनी के चलते अपहरण की घटनाओं से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
दिल्ली पुलिस का ‘ऑपरेशन मिलाप’ और चुनौतियां
बढ़ते मामलों को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने अपनी स्पेशल सेल और एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) को अलर्ट मोड पर रखा है:
- CCTV और सर्विलांस: पुलिस लापता लोगों के आखिरी लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है, लेकिन घनी आबादी वाले इलाकों में कैमरों की कमी जांच में बाधा बन रही है।
- सोशल मीडिया अभियान: गुमशुदा बच्चों की तस्वीरें सार्वजनिक जगहों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा की जा रही हैं।
- अंतराज्यीय समन्वय: चूंकि दिल्ली की सीमाएं हरियाणा और यूपी से सटी हैं, इसलिए पुलिस दूसरे राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर ‘सिंडिकेट’ का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
अभिभावकों में दहशत का माहौल
राजधानी की कॉलोनियों और पार्कों में अब बच्चों को अकेले भेजने में माता-पिता कतरा रहे हैं। स्थानीय निवासी संघों (RWA) ने भी सुरक्षा बढ़ाने और अजनबियों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए निजी सुरक्षा गार्डों को विशेष निर्देश दिए हैं।
“15 दिनों में 800 लोगों का गायब होना कोई सामान्य बात नहीं है। यह एक गंभीर सामाजिक और सुरक्षा संबंधी मुद्दा है। हम प्राथमिकता के आधार पर हर केस की जांच कर रहे हैं और जल्द ही कुछ बड़े गिरोहों का पर्दाफाश होने की उम्मीद है।” — दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी





