पेरिस। आधुनिक युद्ध में बढ़ते ड्रोन खतरे को देखते हुए फ्रांस ने अपनी वायुसेना की क्षमता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। फ्रांस ने राफेल लड़ाकू विमानों को 68 मिमी लेजर गाइडेड रॉकेट प्रणाली से लैस करने की तैयारी पूरी कर ली है। इस नई तकनीक का उद्देश्य कम लागत में दुश्मन के ड्रोन को प्रभावी ढंग से नष्ट करना है।
फ्रांस की रक्षा खरीद एजेंसी डीजीए (DGA) ने राफेल विमान पर लेजर गाइडेड रॉकेट के एकीकरण से जुड़े परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। परीक्षणों में रॉकेट, लॉन्चर पॉड और लक्ष्य पहचान प्रणाली के बीच तालमेल की जांच की गई। इसके बाद इस क्षमता को फ्रांसीसी राफेल बेड़े में शामिल करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे और सस्ते ड्रोन अब आधुनिक युद्ध में बड़ी चुनौती बन चुके हैं। ऐसे ड्रोन को रोकने के लिए महंगी हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का इस्तेमाल हमेशा व्यावहारिक नहीं होता। लेजर गाइडेड रॉकेट कम खर्च में सटीक हमला करने का विकल्प उपलब्ध कराते हैं।
नई प्रणाली से लैस राफेल विमान छोटे मानवरहित हवाई वाहनों (UAV) को अधिक आसानी से निशाना बना सकेंगे। लेजर आधारित मार्गदर्शन तकनीक रॉकेट की सटीकता बढ़ाती है, जिससे ड्रोन रोधी अभियानों में वायुसेना को अतिरिक्त क्षमता मिलेगी।
फ्रांस पहले से ही ड्रोन रोधी रक्षा प्रणालियों पर काम कर रहा है। देश की रक्षा एजेंसी ने उच्च क्षमता वाले लेजर हथियारों के विकास पर भी काम शुरू किया है, जिनका इस्तेमाल भविष्य में ड्रोन और अन्य हवाई खतरों से निपटने के लिए किया जा सकता है।
राफेल में यह नई क्षमता शामिल करना फ्रांस की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें बदलते युद्ध स्वरूप के अनुसार कम लागत और प्रभावी हथियार प्रणालियों को प्राथमिकता दी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ड्रोन रोधी तकनीक सैन्य अभियानों का अहम हिस्सा बन जाएगी।





