Saturday, February 14, 2026

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डिफेंस सेक्टर में भारत की ‘महाशक्ति’ बनने की ओर कदम: रक्षा उत्पादन ने छुए नए आयाम

नई दिल्ली: भारत अब दुनिया के सामने केवल एक बड़े रक्षा खरीदार के रूप में नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली ‘निर्यातक’ के रूप में उभर रहा है। रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, देश का कुल रक्षा उत्पादन अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुँच गया है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के चलते भारत ने न केवल अपनी सेनाओं के लिए हथियारों का निर्माण तेज किया है, बल्कि विदेशी देशों को हथियारों की आपूर्ति में भी ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की है। सबसे सुखद पहलू यह है कि भारत की विदेशों पर सैन्य निर्भरता (आयात) में तेजी से कमी आई है, जिससे देश की रणनीतिक स्वायत्तता और विदेशी मुद्रा भंडार दोनों मजबूत हुए हैं।

निर्यात के मोर्चे पर रिकॉर्ड तोड़ सफलता

भारतीय रक्षा उत्पादों की मांग अब दुनिया भर के देशों में तेजी से बढ़ रही है:

  • आंकड़ों में उछाल: भारत का रक्षा निर्यात अब 21,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है, जो एक दशक पहले की तुलना में कई गुना अधिक है।
  • प्रमुख हथियार प्रणालियाँ: फिलीपींस को ‘ब्रह्मोस’ मिसाइल की डिलीवरी, आर्मेनिया को ‘पिनाका’ रॉकेट सिस्टम और कई देशों को ‘आकाश’ मिसाइल डिफेंस सिस्टम की आपूर्ति ने भारत को ग्लोबल डिफेंस एक्सपोर्ट मार्केट में स्थापित कर दिया है।
  • 85 से अधिक देशों को निर्यात: वर्तमान में भारत दुनिया के लगभग 85 देशों को बुलेटप्रूफ जैकेट, रडार, आर्टिलरी गन और हल्के लड़ाकू विमान (LCA तेजस) जैसे सैन्य साजो-सामान का निर्यात कर रहा है।

आयात में कमी: आत्मनिर्भरता का नया दौर

हथियारों के आयात के लिए कभी दुनिया पर निर्भर रहने वाला भारत अब अपनी जरूरतों को खुद पूरा कर रहा है:

  1. स्वदेशीकरण की सूची (Positive Indigenization Lists): सरकार ने 4,000 से अधिक रक्षा उपकरणों की ऐसी सूची जारी की है, जिनका अब विदेशों से आयात नहीं किया जाएगा। इनका निर्माण अब केवल भारतीय कंपनियों द्वारा ही किया जा रहा है।
  2. घरेलू खरीद में वृद्धि: भारतीय सेनाओं (थल, नभ और जल) के कुल रक्षा बजट का एक बड़ा हिस्सा अब केवल स्वदेशी कंपनियों (जैसे HAL, DRDO, और निजी क्षेत्र की कंपनियां) से खरीदारी के लिए आरक्षित रखा जा रहा है।
  3. तकनीकी हस्तांतरण: भारत अब केवल विदेशी हथियार खरीदने के बजाय ‘ज्वाइंट वेंचर’ और तकनीकी हस्तांतरण पर जोर दे रहा है, जिससे भारत में ही इंजन और जटिल प्रणालियों का निर्माण संभव हो रहा है।

प्रमुख स्वदेशी ‘गेम चेंजर’ हथियार

भारत की इस छलांग में कुछ प्रमुख हथियारों ने अहम भूमिका निभाई है:

  • एलसीए तेजस (LCA Tejas): स्वदेश निर्मित यह हल्का लड़ाकू विमान आज दुनिया के कई देशों की पहली पसंद बन रहा है।
  • INS विक्रांत: भारत के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier) के निर्माण ने भारत को उन चुनिंदा देशों में शामिल कर दिया है जो स्वयं के विशाल युद्धपोत बना सकते हैं।
  • धनुष और एडवांस टोड आर्टिलरी गन (ATAGS): भारतीय तोपखाने की ताकत अब पूरी तरह स्वदेशी हो रही है।

 

भारत सरकार ने लक्ष्य रखा है कि साल 2029 तक रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुँचाया जाएगा। डिफेंस कॉरिडोर (उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु) का विकास और एमएसएमई (MSME) सेक्टर की रक्षा उत्पादन में भागीदारी इस लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जिस गति से आगे बढ़ रहा है, वह दिन दूर नहीं जब भारत दुनिया के टॉप-5 रक्षा निर्यातक देशों की सूची में अपनी जगह पक्की कर लेगा।

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