नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना डिजिटल इंडिया अब ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभा रही है। कभी पिछड़ेपन और संसाधनों की कमी से जूझते गांव आज डिजिटल सुविधाओं से लैस हो रहे हैं। इंटरनेट कनेक्टिविटी और ऑनलाइन सेवाओं की पहुंच ने न सिर्फ ग्रामीण जीवन को आसान बनाया है, बल्कि पंचायत स्तर पर पारदर्शिता और विकास कार्यों की रफ्तार भी तेज कर दी है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश के 6.26 लाख से अधिक गांवों तक अब इंटरनेट की पहुंच हो चुकी है। यह केवल आंकड़ा भर नहीं है, बल्कि ग्रामीण भारत की बदलती जीवनशैली की गवाही भी है। पंचायत भवनों को डिजिटल सेवाओं से जोड़ा गया है, जहां ग्रामीणों को ऑनलाइन आवेदन, सरकारी योजनाओं का लाभ, पेंशन, स्वास्थ्य, शिक्षा और बैंकिंग जैसी सुविधाएं आसानी से मिल रही हैं।
पंचायतें बनीं डिजिटल पारदर्शिता की मिसाल
डिजिटल इंडिया के तहत पंचायतों को ‘ई-गवर्नेंस’ का मॉडल बनाया गया है। अब पंचायत स्तर पर सभी विकास योजनाओं की जानकारी पोर्टल और ऐप पर उपलब्ध है। खर्च और कार्य की जानकारी सार्वजनिक होने से पारदर्शिता बढ़ी है और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा है। ग्रामीण अब घर बैठे अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं और योजनाओं का लाभ सीधे अपने बैंक खाते में पा रहे हैं।
गांवों में बदलती जीवनशैली
गांवों में इंटरनेट पहुंचने से शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को भी नई दिशा मिली है। ऑनलाइन क्लास, टेलीमेडिसिन और डिजिटल भुगतान जैसी सुविधाओं ने ग्रामीणों का जीवन आसान बना दिया है। युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुले हैं, वहीं किसान भी ई-नाम पोर्टल और मोबाइल ऐप के जरिए अपनी उपज का बेहतर दाम पा रहे हैं।
सरकार का फोकस डिजिटल सशक्तिकरण पर
सरकार का कहना है कि डिजिटल इंडिया अभियान का मुख्य उद्देश्य है—हर गांव, हर नागरिक को डिजिटल सेवाओं से जोड़ना। इसके तहत कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) गांव-गांव खोले गए हैं, जहां ग्रामीण इंटरनेट सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण भारत में डिजिटल क्रांति ने न केवल शासन-प्रशासन को जवाबदेह बनाया है, बल्कि सामाजिक-आर्थिक बदलाव की मजबूत नींव भी रखी है। आने वाले वर्षों में यह अभियान ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और सशक्त बनाने में बड़ी भूमिका निभाएगा।





